कुसुम योजना

राज्य उर्जा मंत्रियों का सम्मेलन

दो दिवसीय राज्य उर्जा मंत्रियों का सम्मेलन 11 अक्टूबर 2019 को गुजरात के केवाडिया में  नर्मदा नदी के किनारे शुरू हुआ। इस सम्मेलन का उद्घाटन राज्य उर्जा मंत्री आर.के. सिंह ने किया।

सम्मेलन के मुख्य बिंदु

  • इस सम्मेलन में स्वच्छ उर्जा पर बल दिया जायेगा।
  • इस सम्मेलन में नवीकरणीय तथा सतत उर्जा सेक्टर में उभरती हुई टेक्नोलॉजी पर चर्चा की जायेगी।
  • इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री की कुसुम योजना के क्रियान्वयन पर भी चर्चा की जायेगी।
  • सीमा क्षेत्रों में नवीकरणीय उर्जा विकास के लिए सरकारी योजनाओं को हाईलाइट किया जायेगा।
  • इस सम्मेलन में सौर तथा पवन उर्जा में ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस भी चर्चा का प्रमुख विषय रहेगा।
  • इसमें रूफ टॉप सोलर प्रोजेक्ट्स पर भी विचार विमर्श किया जायेगा।

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कैबिनेट मामलों की आर्थिक समिति ने कुसुम योजना के लांच को मंज़ूरी दी

कैबिनेट मामलों की आर्थिक समेत ने ‘किसान उर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (KUSUM) योजना’ के लांच को मंज़ूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य 2022 तक 25.75 गीगावाट सौर उर्जा क्षमता का उपयोग करके किसानों के लिए जल व वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

योजना के अंग

  • किसान उर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (KUSUM) योजना के तहत 10,000 मेगावाट सौर संयंत्र का निर्माण किया जएगा।
  • इस योजना के अंतर्गत 17.50 लाख कृषि सौर पंप प्रदान किये जाएँगे।
  • 10 लाख ग्रिड-कनेक्टेड सौर उर्जा कृषि पंप का उपयोग।

योजना की विशेषताएं

कॉम्पोनेन्ट-ए

  • किसानों, कोआपरेटिव, पंचायत अथवा किसान उत्पादक संगठनों द्वारा बंजर अथवा कृषि योग्य भूमि पर 500 किलोवाट से 5 मेगावाट के नवीकरणीय उर्जा प्लांट स्थापित किये जायेंगे।
  • इस सौर उर्जा प्लांट से उत्पादित विद्युत् को वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) द्वारा राज्य विद्युत् रेगुलेटरी आयोग द्वारा निर्धारित दर पर खरीदा जायेगा।
  • इस योजना से ग्रामीण भूमि मालिकों को आय का स्थिर तथा निरंतर साधन उपलब्ध होगा।
  • डिस्कॉम्स को पांच वर्ष के लिए 0.40 रुपये प्रति यूनिट का प्रदर्शन आधारित इंसेंटिव भी दिया जायेगा।

कॉम्पोनेन्ट-बी

  • 7.5 हॉर्सपॉवर की क्षमता वाले पंप स्थापित करने के लिए किसानों को सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी।

कॉम्पोनेन्ट-सी

  • किसान सौर उर्जा पंप द्वारा उत्पादित विद्युत् का उपयोग सिंचाई की आवश्यकता के लिए कर सकता है तथा अतिरिक्त विद्युत् को वह डिस्कॉम को बेच सकता है।
  • इससे किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।

इस योजना का पर्यावरण पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ेगा। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इस योजना से प्रतिवर्ष 27 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की बचत होगी।

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