केंद्र सरकार

इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट को अतिरिक्त 200 मंडियों से जोड़ेगी सरकार

केंद्र सरकार इस वित्त वर्ष (2018-19) में ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफार्म ईएनएएम (इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट) को अतिरिक्त 200 थोक मंडियों को जोड़ने जा रही है जो अंतर-मंडी लेनदेन को भी प्रोत्साहित करती है। वर्तमान में, 14 राज्यों में 585 विनियमित मंडी ईएनएएम से जुडी हुई हैं। अब तक, 73.50 लाख किसान, 53,163 कमीशन एजेंट और 1 लाख से अधिक व्यापारी 14 राज्यों से इससे पंजीकृत हैं। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि सभी थोक कृषि-मंडी ऑनलाइन नीलामी को अपनाएं और धीरे-धीरे राज्य में मंडियों के बीच व्यापार और अंततः राज्यों के बाहर मंडियों के बीच व्यापार की अनुमति दें, जिससे किसानों के लाभ हेतु एकल राष्ट्रीय कृषि बाजार स्थापित किया जा सके।

ई एनएएम (इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट)

ईएनएएम कृषि उपज के लिए अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक व्यापार पोर्टल है इसका लक्ष्य कृषि वस्तुओं के लिए बाजारों को एकीकृत करके मौजूदा कृषि उत्पादन बाजार समिति (एपीएमसी) द्वारा एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनाना है। यह सभी एपीएमसी से संबंधित सेवाओं और सूचनाओं के लिए एकल खिड़की सेवा (single window service) प्रदान करता है, जैसे कमोडिटी आगमन और कीमतें, व्यापार प्रस्तावों का जवाब देने के प्रावधान, अन्य सेवाओं के बीच व्यापार प्रस्तावों को खरीदने और बेचने के लिए प्रावधान आदि शामिल है। इसे अप्रैल 2016 में लॉन्च किया गया था।

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आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के रूप में बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम के नामकरण को मंजूरी दी

अल्पसंख्यक समुदायों को बेहतर सामाजिक-आर्थिक आधारभूत सुविधाएं प्रदान करने और योजना के कवरेज को विस्तारित करने के उद्देश्य से ‘प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम’ के रूप में बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम के नामकरण और पुनर्गठन के प्रस्ताव को आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने मंजूरी दे दी है। इसे 14 वें वित्त आयोग की शेष अवधि के दौरान जारी रखने को भी मंजूरी दे दी है। इस योजना से राष्ट्रीय औसत और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच पिछड़ेपन के मानकों का अंतर कम हो जाएगा।

मुख्य तथ्य

अल्पसंख्यकों को इस पुनर्गठित कार्यक्रम से बेहतर सामाजिक आर्थिक सुविधाएं प्राप्त होंगी। इसमें विशेष रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य व कौशल विकास के क्षेत्र शामिल हैं।
सरकार द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों की जनसंख्या प्रतिशत मानदंड को कम करके अल्पसंख्यकों के कस्बों और गांवों के समूहों की पहचान को भी तर्कसंगत बनाया गया है।
प्रधान मंत्री जन विकास कार्यक्रम योजना में अल्पसंख्यक समुदायों को बेहतर सुविधाएं प्रदान की जाएगी। केंद्र सरकार इस कार्यक्रम को अल्पसंख्यक कस्बों (एमसीटी) और गांव के 57% से अधिक क्षेत्रों में लागू करेगी ।

बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (एमएसडीपी)

इसे 2008-2009 में 90 अल्पसंख्यक केन्द्रित जिलों (एमसीडी) में लॉन्च किया गया था। अल्पसंख्यक कल्याण की योजना का दायरा केंद्र सरकार 198 से बढ़ाकर अब इसे 308 जिलों में लागू करने जा रही है। इस योजना के तहत अल्पसंख्यकों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास हेतु सामाजिक-आर्थिक बुनियादी ढांचे में सुधार लाया जाएगा।

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