केंद्र सरकार

सुंदरबन संरक्षित वन रामसर आर्द्रभूमि स्थल की मान्यता प्राप्त करेगा

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य वन विभाग को सुंदरबन रिजर्व वन में रामसर सम्मेलन के तहत प्रतिष्ठित रामसर साइट मान्यता के लिए आवेदन करने की मंजूरी दे दी है। अब केंद्र सरकार के माध्यम से राज्य वन विभाग रामसर कन्वेंशन सचिवालय के लिए आवेदन करेगा।

मुख्य तथ्य

रामसर आर्द्रभूमि साइट का दर्जा पाने के बाद सुंदरबन रिजर्व वन देश में सबसे बड़ी संरक्षित आर्द्रभूमि होगी। भारत में पश्चिम बंगाल के पूर्वी कोलकाता वेटलैंड्स सहित 26 साइटें को वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय महत्व के रामसर आर्द्रभूमि स्थलों के रूप में मान्यता प्राप्त हैं। सुंदरबन रिजर्व वन 4,260 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है जिसमें 2,000 वर्ग किमी के मैंग्रोव वन और क्रीक इसे आर्द्रभूमि हेतु आदर्श स्थल (site) बनाते हैं। रामसर कन्वेंशन के तहत अंतर्राष्ट्रीय महत्व के आर्द्रभूमि साइट का दर्जा सुंदरबन (जो पहले से ही विश्व धरोहर स्थल है) के संरक्षण में मदद करेगा , जो जलवायु परिवर्तन और बढ़ते समुद्र स्तर के खतरे का सामना कर रहा है।

सुंदरबन

सुंदरबन भारत तथा बांग्लादेश के तटीय क्षेत्र में विशाल और संगठित मैंग्रोव वन पारिस्थितिक तंत्र है जो भारत और बांग्लादेश में फैला है। इसमें लगभग 10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र शामिल है जिसमें से 60% बांग्लादेश में हैं और शेष भारत में हैं। यह पद्मा, मेघना और ब्रह्मपुत्र नदी घाटी के डेल्टा क्षेत्र में स्थित है।

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सतलज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) लिमिटेड ने ऊर्जा मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

सतलज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) लिमिटेड ने वर्ष 2018-19 के लिए 9200 मिलियन यूनिट बनाने के लिए ऊर्जा मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। नई दिल्ली में विद्युत सचिव अजय कुमार भल्ला और एसजेवीएन चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) नंद लाल शर्मा ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

मुख्य तथ्य

समझौता ज्ञापन में निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान सतलज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) लिमिटेड ‘उत्कृष्ट’ श्रेणी के तहत 9200 मिलियन यूनिट उत्पादन प्राप्त करेगा। इसके अलावा, सतलज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) लिमिटेड के पास 900 करोड़ रुपये का पूंजी व्यय का लक्ष्य होगा इसके आलावा परिचालन दक्षता तथा परियोजना निगरानी से संबंधित अन्य लक्ष्यों के साथ 2175 करोड़ रुपये के टर्नओवर का लक्ष्य होगा।

सतलज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) लिमिटेड

यह बिजली मंत्रालय के तहत एक मिनी रत्न तथा अनुसूची ‘ए’ के तहत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (सीपीएसयू) है। यह केंद्र सरकार (64.46% शेयर) तथा हिमाचल प्रदेश सरकार (25.51% शेयर) के बीच का संयुक्त उद्यम है। इसे 1988 में स्थापित किया गया था। इसका मुख्यालय शिमला, हिमाचल प्रदेश में है। इसकी वर्तमान उर्जा उत्पादन क्षमता 1,964 मेगावाट है

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