केंद्र सरकार

केंद्र सरकार ने 10 सार्वजनिक सेक्टर के बैंकों के विलय की घोषणा की

केंद्र सरकार ने सार्वजनिक सेक्टर के बैंकों का विलय 4 बैंकों में करने का निर्णय लिया है। इस विलय के बाद सार्वजनिक सेक्टर के बैंकों की संख्या 12 रह जाएगी।

मुख्य बिंदु

पंजाब नेशनल बैंक, ओरिएण्टल बैंक ऑफ़ कॉमर्स तथा यूनाइटेड बैंक का विलय एक इकाई में किया जायेगा, यह भारतीय स्टेट बैंक के बाद दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बन जायेगा। केनरा बैंक तथा सिंडिकेट बैंक का विलय करके देश का चौथा सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक अस्तित्व में आएगा। यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया, आंध्र बैंक तथा कारपोरेशन बैंक का विलय एक इकाई के रूप में किया जायेगा, यह देश का पांचवा सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक होगा।

इंडियन बैंक का विलय इलाहबाद बैंक के साथ किया जाएगा, यह देश का सातवाँ सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक होगा।  बैंक ऑफ़ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र तथा पंजाब एंड सिंध बैंक मौजूदा स्वरुप में कार्य करते रहेंगे।

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केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को अस्वीकार किया

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य का नाम बदलकर बांग्ला करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था, केंद्र ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।

पृष्ठभूमि

पश्चिम बंगाल के नाम को बदलकर बांग्ला रखने के लिए दो वर्ष पूर्व अगस्त, 2016 में पहली बार प्रस्तुत किया था। इससे पहले राज्य सरकार ने पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर बांग्ला रखने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा है। परन्तु केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था।

राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया

नाम बदलने की प्रक्रिया राज्य द्वारा शुरू की जा सकती है। संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार संसद को राज्य के प्रस्ताव के बिना भी राज्य के नाम को बदलने की शक्ति है। यदि नाम बदलने की प्रक्रिया राज्य की विधानसभा द्वारा शुरू की जाती है, तो सर्वप्रथम राज्य को इसके लिए एक प्रस्ताव पारित करना होगा। राज्य द्वारा प्रस्ताव पारित करने के बाद केन्द्रीय गृह मंत्रालय के पास भेजा जायेगा। तत्पश्चात केन्द्रीय गृह मंत्रालय, कैबिनेट के लिए प्रथम अनुसूची में संशोधन के लिए नोट तैयार करता है। उसके बाद संवैधानिक संशोधन संसद में प्रस्तुत किया जाता है। संसद के सामान्य बहुमत द्वारा पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंज़ूरी के लिए भेजा जाता है, इसके बाद राज्य के नाम परिवर्तित होता है।

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