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केंद्र सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक के पुनरावलोकन के लिए वर्किंग ग्रुप का गठन किया

केंद्र सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक के पुनरावलोकन के लिए वर्किंग ग्रुप का गठन किया है। इसके अध्यक्ष नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद होंगे। आर्थिक सलाहकार कार्यालय इस वर्किंग ग्रुप का नोडल कार्यालय होगा।

मुख्य बिंदु

  • यह वर्किंग ग्रुप थोक मूल्य सूचकांक तथा उत्पादक मूल्य सूचकांक की नयी आधिकारिक श्रृंखला के लिए उचित आधार वर्ष का चयन करेगा।
  • यह समूह मौजूदा थोक मूल्य सूचकांक में शामिल की जाने वाली वस्तुओं की समीक्षा भी करेगा।
  • यह समूह विनिर्माण सेक्टर के लिए मूल्य संग्रहण प्रणाली की समीक्षा भी करेगा।
  • यह समूह मूल्य श्रृंखला तथा जीवन निर्वाह लागत पर तकनीकी सलाहकार समिति की समीक्षा भी करेगा।
  • यह कोई अन्य सुझाव भी दे सकता है जिससे थोक मूल्य सूचकांक/उत्पादक मूल्य सूचकांक की विश्वसनीयता में वृद्धि हो।

पृष्ठभूमि

मौजूदा थोक मूल्य सूचकांक को मई, 2017 में शुरू किया गया था, इसका आधार वर्ष 2011-12 था। गौरतलब है कि 2011-12 से अब तक भारतीय अर्थव्यवस्था में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन आ चुके हैं, इसलिए थोक मूल्य सूचकांक में शामिल की जाने वाली वस्तुओं की समीक्षा की जानी आवश्यक है।

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कैबिनेट ने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन को 6 महीने के लिए आगे बढ़ाया

केन्द्रीय कैबिनेट ने संविधान के अनुच्छेद 356(4) के तहत जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन को 6 महीने तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह फैसला जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में 2 जुलाई, 2019 को राष्ट्रपति शासन की अवधि समाप्त हो रही है। अब 3 जुलाई, 2019 से राष्ट्रपति शासन की अवधि 6 महीने के लिए बढ़ जायेगी।

संसद के सत्र में राष्ट्रपति शासन की अवधि को बढ़ाने के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किये जायेंगे।

पृष्ठभूमि

जून 2018 में भारतीय जनता पार्टी ने पीडीपी से अपना समर्थन वापस लिया था, जिसके कारण जम्मू-कश्मीर में महबूबा मुफ़्ती के नेतृत्व वाली पीडीपी सरकार गिर गयी थी। इसके बाद राज्य में राज्यपाल शासन लागू हुआ था। 1996 के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ है।

चूंकि जम्मू-कश्मीर का संविधान अलग है, इसलिए जम्मू-कश्मीर के संविधान के सेक्शन 92 के अनुसार राज्य की वैधानिक मशीनरी कार्यशील न होने के कारण 6 महीने तक राज्यपाल शासन लागू होता है। 6 महीने तक राज्यपाल शासन के बाद जम्मू-कश्मीर के संविधान में इसे आगे बढ़ाने की कोई और व्यवस्था नही है, इसलिए राज्यपाल शासन की अवधि समाप्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लागु किया गया।

चुनाव आयोग ने अपने वक्तव्य में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत इस वर्ष जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव करवाया जायेंगे। इसके लिए तिथियों की घोषणा अगस्त, 2019 में अमरनाथ यात्रा के समापन के बाद की जायेगी। चुनाव आयोग जम्मू-कश्मीर के हालात पर लगातार नज़र बनाये हुए है।

राष्ट्रपति शासन

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 के अनुसार यदि किसी राज्य में सरकार संविधान के मुताबिक नहीं चलाई जा रही है तो राष्ट्रपति उक्त राज्य में राष्ट्रपति शासन की घोषणा कर सकते हैं। यह निर्णय राज्य में संवैधानिक मशीनरी फेल होने के परिणामस्वरूप लिया जाता है। राष्ट्रपति शासन एक समय में 6 महीने के लिए लगाया जा सकता है, बाद में लोकसभा व राज्यसभा की सहमती से इस अवधि को अधिकतम 3 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।

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