केंद्र सरकार

कैबिनेट ने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन को 6 महीने के लिए आगे बढ़ाया

केन्द्रीय कैबिनेट ने संविधान के अनुच्छेद 356(4) के तहत जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन को 6 महीने तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह फैसला जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में 2 जुलाई, 2019 को राष्ट्रपति शासन की अवधि समाप्त हो रही है। अब 3 जुलाई, 2019 से राष्ट्रपति शासन की अवधि 6 महीने के लिए बढ़ जायेगी।

संसद के सत्र में राष्ट्रपति शासन की अवधि को बढ़ाने के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किये जायेंगे।

पृष्ठभूमि

जून 2018 में भारतीय जनता पार्टी ने पीडीपी से अपना समर्थन वापस लिया था, जिसके कारण जम्मू-कश्मीर में महबूबा मुफ़्ती के नेतृत्व वाली पीडीपी सरकार गिर गयी थी। इसके बाद राज्य में राज्यपाल शासन लागू हुआ था। 1996 के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ है।

चूंकि जम्मू-कश्मीर का संविधान अलग है, इसलिए जम्मू-कश्मीर के संविधान के सेक्शन 92 के अनुसार राज्य की वैधानिक मशीनरी कार्यशील न होने के कारण 6 महीने तक राज्यपाल शासन लागू होता है। 6 महीने तक राज्यपाल शासन के बाद जम्मू-कश्मीर के संविधान में इसे आगे बढ़ाने की कोई और व्यवस्था नही है, इसलिए राज्यपाल शासन की अवधि समाप्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लागु किया गया।

चुनाव आयोग ने अपने वक्तव्य में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत इस वर्ष जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव करवाया जायेंगे। इसके लिए तिथियों की घोषणा अगस्त, 2019 में अमरनाथ यात्रा के समापन के बाद की जायेगी। चुनाव आयोग जम्मू-कश्मीर के हालात पर लगातार नज़र बनाये हुए है।

राष्ट्रपति शासन

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 के अनुसार यदि किसी राज्य में सरकार संविधान के मुताबिक नहीं चलाई जा रही है तो राष्ट्रपति उक्त राज्य में राष्ट्रपति शासन की घोषणा कर सकते हैं। यह निर्णय राज्य में संवैधानिक मशीनरी फेल होने के परिणामस्वरूप लिया जाता है। राष्ट्रपति शासन एक समय में 6 महीने के लिए लगाया जा सकता है, बाद में लोकसभा व राज्यसभा की सहमती से इस अवधि को अधिकतम 3 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।

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भारतीय रिज़र्व बैंक अंतरिम लाभांश के रूप में सरकार को 28,000 करोड़ रुपये का हस्तांतरण करेगा

भारतीय रिज़र्व बैंक अंतरिम लाभांश के रूप में सरकार को 28,000 करोड़ रुपये का हस्तांतरण करेगा। इससे पहले अगस्त, 2018 में भी भारतीय रिज़र्व बैंक ने सरकार को 40,000 करोड़ रुपये हस्तांतरित किये थे। इस प्रकार वर्तमान वित्त वर्ष में यह राशि 68,000 करोड़ रुपये हो जायेगी। यह राशि भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा एक वर्ष में केंद्र सरकार को दी जाने वाली उच्चतम प्राप्त होगी। इससे पहले वित्त वर्ष 16 में यह आंकड़ा 65,896 करोड़ रुपये तथा वित्त वर्ष 18 में 40,659 करोड़ रुपये था।

भारतीय रिज़र्व बैंक जुलाई-जून वित्तीय वर्ष का पालन करता है, यह सामान्यतया अगस्त में लाभांश का वितरण करता है। भारतीय रिज़र्व बैंक लगातार दूसरे वर्ष अंतरिम लाभांश प्रदान कर रहा है। पीछे वर्ष मार्च में भारतीय रिज़र्व बैंक ने 10,000 करोड़ रुपये अंतरिम लाभांश के रूप में सरकार को दिए थे।

भारतीय रिज़र्व बैंक के द्वारा प्रदान किये जाने वाले इस अंतरिम लाभांश से सरकार को संशोधित बजट अनुमान को पूरा करने में सहायता मिलेगी। सरकार ने पहली बार किसानों के लिए आय हस्तांतरण योजना शुरू की है। वित्त वर्ष 19 में सरकार ने भारतीय रिज़र्व बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंकों तथा वित्तियों संस्थाओं से 74,140 करोड़ रुपये लाभांश तथा अधिशेष का संशोधित अनुमान रखा है।

भारतीय रिजर्व बैंक

भारतीय रिजर्व बैंक भारत का केन्द्रीय बैंक है। यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है। रिजर्व बैक भारत की अर्थव्यवस्था को नियन्त्रित करता है। 1 अप्रैल सन 1935 को इसकी स्थापना रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया अधिनियम, 1934 के अनुसार हुई थी।

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