केंद्र सरकार

सर्वोच्च न्यायालय ने आईटी अधिसूचना के लिए केंद्र को जारी किया नोटिस

हाल ही में केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी करके 10 केन्द्रीय एजेंसियों को भारत में किसी भी कंप्यूटर सिस्टम के डाटा को इंटरसेप्ट, मॉनिटर तथा डीक्रिप्ट करने की अनुमति दी थी। इस अधिसूचना के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को नोटिस जारी किया है ।

मुख्य बिंदु

जिन 10 एजेंसियों को यह निगरानी की अनुमति दी गयी है, वे इस प्रकार हैं : इंटेलिजेंस ब्यूरो, नारकोटिक्स, कण्ट्रोल ब्यूरो, राजस्व इंटेलिजेंस निदेशालय, सीबीआई, राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी (NIA), प्रवर्तन निदेशालय, केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग, डायरेक्टरेट ऑफ़ सिग्नल इंटेलिजेंस (जम्मू-कश्मीर, उत्तर-पूर्व तथा असम) तथा दिल्ली पुलिस।

सरकार के अनुसार यह अधिसूचना आईटी (सूचना के इंटरसेप्शन तथा मॉनिटरिंग प्रक्रिया) नियम, 2009 के नियम 4 की आवश्यकताओं को पूरा करती है। इसके अनुसार सरकार को डाटा के इंटरसेप्शन, मोनिटरिंग तथा डीक्रिप्शन के लिए एजेंसियों की सूची तैयार करनी पड़ती है ।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के द्वारा भारत में साइबर अपराध का प्रबंधन किया जाता है । सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 में साइबर अपराध की छानबीन के लिए डाटा की मोनिटरिंग, इंटरसेप्शन तथा डीक्रिप्शन की व्यवस्था है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (सूचना के इंटरसेप्शन तथा मॉनिटरिंग प्रक्रिया), 2009 को सेक्शन के तहत अधिसूचित किया गया है ।

याचिकर्ता का पक्ष

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका के पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिए हैं :

  1. यह अधिसूचना अवैध व असंवैधानिक है।
  2. इस अधिसूचना का उपयोग राजनीती प्रतिद्वंदियों पर रोक लगाने के लिए जा रहा है, इसे भारतीय संविधान के तहत अनुमति नहीं दी जा सकती।
  3. यह अधिसूचना निजता के मूलभूत अधिकार के विरुद्ध है।
  4. इस अधिसूचना के द्वारा “निगरानी राज्य” के निर्माण का प्रयास किया जा रहा है।
  5. इस अधिसूचना के द्वारा सरकार सभी संचार, कंप्यूटर तथा मोबाइल के डाटा को अपनी राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर सकती है।

सरकार ने राष्ट्र हित का हवाला देते हुए अपने आदेश का बचाव किया है और यह भी कहा कि यह UPA सरकार द्वारा 2009 में पारित किये गये नियमों की पुनरावृत्ति है।

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NAFED ने केंद्र सरकार की योजना के तहत राज्यों को 5 लाख टन दाल बेची

NAFED (भारतीय राष्ट्रीय कृषि कोआपरेटिव मार्केटिंग संघ ) ने केंद्र सरकार की योजना के तहत 10 राज्यों तथा एक केंद्र शासित प्रदेश को लगभग 5 लाख टन दाल बेची।

केंद्र सरकार ने यह योजना शुरू क्यों की?

यह योजना अपने आप में एक नई किस्म की योजना है। इसका उद्देश्य पिछले वर्षों में एकत्रित किये गये दाल के स्टॉक का उपयोग करना है। इससे निर्धन परिवारों को पौष्टिक भोजन भी प्राप्त हो सकेगा, इस योजना के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • निर्धन लोगों को कम कीमत पर दालें उपलब्ध करवाना।
  • किसानों को नई फसल के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करवाना।

इस योजना की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • इन दालों की सब्सिडाइज्ड कीमत मंडी भाव से लगभग 15 रुपये कम है।
  • इस योजना के तहत राज्यों द्वारा दाल खरीदने पर कोई सीमा नहीं है, परन्तु राज्यों को अपनी मांग का औचित्य सिद्ध करना होगा।
  • इस खरीदी हुई दाल को राज्यों को केवल कल्याणकारी योजनाओं के तहत ही वितरित करना होगा तथा इसका प्रमाण भी देना होगा।

इस योजना के प्रभाव अब दृश्यमान हो रहे हैं, हालाँकि अभी इस योजना को शुरू किये केवल 2-3 महीने ही हुए हैं। इस योजना के द्वारा मंडी कीमतों में वृद्धि हो रही है, इसका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है। जबकि दूसरी ओर निर्धन लोगों को राज्य सरकार द्वारा मंडी दाम से कम  कीमत पर दाल उपलब्ध करवाई जा रही है। इस योजना की शुरुआत में ही दाल के मंडी भाव में 300 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल  की वृद्धि हुई है।

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