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केंद्र सरकार करेगी चार सहकारी बैंकों का विलय

केंद्र सरकार चार सरकारी बैंकों आईडीबीआई, ओरिएंटल बैंक ऑफ़ कॉमर्स (ओबीसी), सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) का विलय करने जा रही है. इस विलय का कारण इन बैंकों का 2017-18 के वित्तीय वर्ष खत्म होने तक लगभग 21,646.38 करोड़ रुपये का घाटा होना है. इन चारों बैंकों के विलय के बाद बनने वाला बैंक देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक हो सकता है.

मुख्य तथ्य

केंद्र सरकार ने एसबीआई को दुनिया के टॉप 50 बैंकों में शामिल करने के उद्देश्य से 1 अप्रैल, 2017 को एसबीआई के पांच एसोसिएट बैंकों सहित भारतीय महिला बैंक का स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ विलय किया था. और इस विलय से मिली सफलता के बाद अब सरकार चार और बैंकों का विलय करने जा रही है. यदि यह विलय सफल रहा तो इसके परिणाम के रूप में विलय के बाद बनने वाला बैंक एसबीआई के बाद आने वाला देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक होगा. जिसकी कुल संपत्ति 16.58 लाख करोड़ रुपये तक की हो सकती है. इस विलय से सरकार 10,000 करोड़ रूपये तक भी इकट्ठा कर सकेगी.इस विलय से कमजोर बैंकों की खस्ताहालत में निश्चित रूप से सुधार देखने को मिलेगा. विलय के बाद बैंकों की घाटे वाली शाखाएँ बंद कर दी जाएंगी और कर्मचारियों की छंटनी भी की जाएगी.

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डीएसी ने रक्षा खरीद प्रक्रिया को सरल बनाने के उपायों को मंजूरी दी

केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीपीपी) को सरल बनाने के लिए विभिन्न उपायों को मंजूरी दे दी है। डीएसी भारतीय सशस्त्र बलों (सेना, नौसेना और वायुसेना) की पूंजी खरीद (capital procurement) पर रक्षा मंत्रालय का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है।

मुख्य तथ्य

इन उपायों को डीपीपी -16 में मैनुअली संचालित रक्षा खरीद प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा । परिवर्तनों में रक्षा तथा सेवा मंत्रालय मुख्यालय के भीतर शक्तियों का वितरण शामिल है। दोहराव वाली प्रक्रियाओं को हटाने, क्रमिक चरण मंजूरी के बजाय अधिग्रहण प्रक्रिया के समवर्ती चलन, संशोधित वित्तीय दिशानिर्देशों के साथ विभिन्न दस्तावेजों को संरेखित (aligning) करना, इनमे शामिल है।

पृष्ठभूमि

केंद्र सरकार ने अब तक सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के अपने प्रयासों के तहत 135 प्रस्तावों में करीब 4 लाख करोड़ रुपये की सैन्य खरीद के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। लेकिन सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की गति प्रक्रिया में देरी के चलते इन प्रस्तावों में से अधिकांश अभी तक लागू नहीं हो पा रहे हैं।

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