केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय

भारत प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट असेसमेंट (PISA) में 2021 में हिस्सा लेगा

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से ‘प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट असेसमेंट (PISA)’ में 9 वर्ष बाद हिस्सा लेने का निर्णय लिया है। 2021 में इस टेस्ट में हिस्सा लेने के लिए अधिकारीयों की एक टीम को पेरिस भेजा जायेगा।

प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट असेसमेंट (PISA)

PISA 15 वर्षीय छात्रों एक एक मूल्यांकन टेस्ट है, इसका आयोजन प्रत्येक तीन वर्षों बाद अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग विकास संगठन (OECD) द्वारा किया जाता है। इस टेस्ट की शुरुआत वर्ष 2000 में की गयी थी, इसमें 43 देशों ने भाग लिया था। वर्ष 2015 के संस्करण में चीन और वियतनाम सहित 73 देशों ने इस टेस्ट में हिस्सा लिया।

PISA में गणित, विज्ञान तथा छात्रों के पढ़ने का परीक्षण किया जाता है। इसमें छात्रों की समस्या समाधान क्षमता और आर्थिक साक्षरता की भी परीक्षा ली जाती है। इस टेस्ट का निर्माण विश्व भर के शिक्षा विशेषज्ञों द्वारा किया गया है। इस टेस्ट यह मूल्यांकन किया जाता है कि छात्रों ने जो कुछ सीखा है वे उसका वास्तविक जीवन में किस प्रकार उपयोग करते हैं।

PISA टेस्ट से विश्व भर के विभिन्न देशों की शिक्षा प्रणालियों के बारे में जानकारी मिलती है। इस टेस्ट में छात्रों द्वारा स्कोर किये गए अंकों से राष्ट्रीय औसत स्कोर निकाला जाता है। इस टेस्ट का उद्देश्य देशों की रैंकिंग निश्चित करना नहीं है, बल्कि यह पता लगाना है कि किस प्रकार देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार किया जा सकता है। इस टेस्ट में देश के विभिन्न हिस्सों से 15 वर्षीय छात्रों को भाग लेने के लिए भेजा जाता है। 2012 के PISA टेस्ट में गणित, विज्ञान तथा पढ़ने के मामले में शंघाई के विद्यालय पहले स्थान पर थे। इसमें दूसरे स्थान पर सिंगापुर था। 2015 के PISA टेस्ट में सिंगापुर, जापान और एस्तोनिया क्रमशः पहले, दूसरे तथा तीसरे स्थान पर थे।

भारत द्वारा PISA का बहिष्कार

भारत ने PISA टेस्ट में 2009 में पहली बार भाग लिया था, इसमें 400 विद्यालयों से लगभग 16,000 छात्रों ने हिस्सा लिया। परन्तु इस टेस्ट में भारत के प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा, 74 देशों की सूची में भारत को 72वां स्थान प्राप्त हुआ। सरकार ने इस परीक्षा में पूछे गए सवालों को “विषय से बाहर” बताकर आगे इस टेस्ट में भाग नहीं लेने का फैसला लिया।

बहिष्कार का पुनरवलोकन

वर्ष 2016 में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने PISA टेस्ट के बहिष्कार के फैसले का पुनरवलोकन किया और केन्द्रीय विद्यालय संगठन ने इस मामले में समिति का गठन किया, इस समिति ने दिसम्बर 2016 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में 2018 के PISA टेस्ट में भाग लेने की सिफारिश की गयी थी। परन्तु भारत इस टेस्ट में भाग लेने की अंतिम तिथि से पहले आवेदन नहीं कर सका।

PISA 2021

PISA 2021 में केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ तथा केन्द्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय हिस्सा ले सकते हैं। इसके लिए चंडीगढ़ का चयन इसलिए किया गया क्योंकि सीखने के मामले में चंडीगढ़ का रिकॉर्ड काफी अच्छा है। चंडीगढ़ में हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओँ में शिक्षा प्रदान की जाती है।

 

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जन शिक्षण संस्थानों के लिए नए नियम जारी किये गये

केन्द्रीय कौशल विकास व उद्यमशीलता मंत्रालय ने जन शिक्षण संस्थानों के लिए नए दिशानिर्देश जारी किये हैं। इसका उद्देश्य जन शिक्षण संस्थानों को और अधिक उपयोगी बनाना है। जन शिक्षण संस्थानों के लिए नए दिशानिर्देश निम्नलिखित हैं :

  • प्रशिक्षण को मानकीकृत बनाने के लिए जन शिक्षण संस्थान के कोर्स तथा पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क के मुताबिक तैयार किया जायेगा।
  • जिला प्रशासन को जवाबदेही तथा स्वतंत्रता प्रदान करने के लिए शक्तियों का विकेंद्रीकरण।
  • जिले में कौशल विकास के द्वारा परंपरागत कौशल को चिन्हित करना तथा उन्हें बढ़ावा देना।
  • सरल ऑनलाइन सर्टिफिकेशन
  • जवाबदेही तथा पारदर्शिता बनाये रखने के लिए जन शिक्षण संस्थान को सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली से जोड़ना।
  • जन शिक्षण संस्थान को आजीविका से जोड़ना।
  • राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों के द्वारा प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देना।

जन शिक्षण संस्थान

जन शिक्षण की स्थापना अनपढ़, नए पढ़े लिखे तथा स्कूल ड्राप-आउट्स को व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करने के लिए की गयी है। जन शिक्षण संस्थान का स्कोप निम्नलिखित हैं :

  • व्यवसायिक प्रशिक्षण के लिए उचित पाठ्यक्रम तथा ट्रेनिंग मोड्यूल तैयार करना।
  • व्यस्क शिक्षा निदेशालय, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्थान तथा रोज़गार व प्रशिक्षण महानिदेशक के सामानांतर कोर्स का निर्माण।
  • प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए मास्टर ट्रेनर को प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • सामान्य परीक्षाओं का आयोजन तथा प्रमाण पत्र प्रदान करना।
  • प्रशिक्षण लेने वाले लोगों की प्लेसमेंट के लिए रोज़गार दाताओं के साथ समझौते करना।

शुरू में जन शिक्षण संस्थान केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन थे, अब यह केन्द्रीय कौशल विकास व उद्यमशीलता मंत्रालय के अधीन हैं। केन्द्रीय कौशल विकास तथा उद्यमशीलता मंत्रालय ने http://www.jss.gov.in नाम वेबसाइट शुरू की है, इस वेबसाइट में विभिन्न किस्म की जानकारी उपलब्ध होगी।

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