केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय

जुलाई 2018 में औद्योगिक उत्पादन दर (IIP) रही 6.6%

केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी किये गए डाटा के अनुसार जुलाई में औद्योगिक उत्द्पन दर 6.6% रही। यह सीमेंट, रिफाइनरी, उर्वरक और कोयला सेक्टर के अच्छे प्रदर्शन के कारण बेहतर रही। अप्रैल-जुलाई, 2018 में यह दर 5.4% थी।

जुलाई 2018 औद्योगिक उत्पादन दर

निर्माण क्षेत्र (भार : 77.6) : इस क्षेत्र में 7% विकास दर दर्ज की गयी।

विद्युत् सेक्टर (भार : 7.9%) : इस सेक्टर में 6.7% वृद्धि दर्ज की गयी।

खनन (भार : 14.3%) : इस सेक्टर में 3.7% वृद्धि दर्ज की गयी।

उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र : इस क्षेत्र में 14.4% की वृद्धि दर्ज की गयी।

पूंजीगत वस्तु उत्पादन : इस क्षेत्र में 3% की वृद्धि दर्ज की गयी।

औद्योगिक उत्पादन दर सूचकांक

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के द्वारा लघु काल में कुछ एक निश्चित औद्योगिक उत्पादों के उत्पादन में होने वाले परिवर्तन को दर्शाता है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का प्रकाशन केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन द्वारा प्रति माह किया जाता है।

सीएसओ ने आईआईपी के आधार वर्ष को मई 2017 में 2004-05 से 2011-12 में संशोधित किया था ताकि अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तनों को हासिल किया जा सके और गुणवत्ता सूचकांकों को बेहतर बनाया जा सके।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में कुल 407 वस्तु समूह शामिल किये गए हैं, इसमें वस्तुओं को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है: विनिर्माण क्षेत्र में 405 वस्तुएं, उत्खनन और विद्युत में एक-एक वस्तु को शामिल किया गया है। इन तीनो वस्तु समूहों का भार 77.63%, 14.37% तथा 7.9% है।

कोर सेक्टर का भार : पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद (28.04%), विद्युत् उत्पादन (19.85%), स्टील उत्पादन (17.92%), कोयला उत्पादन (10.33%), कच्चा तेल उत्पादन (8.98%), प्राकृतिक गैस उत्पादन (6.88%), सीमेंट (5.37%), उर्वरक (2.63%)।

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खुदरा महंगाई दर फरवरी, 2018 में 4.44 फीसदी रही

-केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने फरवरी, 2018 के लिए उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) पर आधारित महंगाई दर के आंकड़े भी जारी किए। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सीएफपीआई आधारित महंगाई दर 3.62 फीसदी (अनंतिम) रही, जो फरवरी 2017 में 2.01 थी। इसी तरह शहरी क्षेत्रों के लिए सीएफपीआई आधारित महंगाई दर फरवरी, 2018 में 2.45 फीसदी (अनंतिम) आंकी गई, जो फरवरी 2017 में 1.87 फीसदी थी। ये दरें जनवरी, 2018 में क्रमशः 5.05 तथा 4.06 फीसदी (अंतिम) थीं।

-शहरी एवं ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों पर समग्र रूप से गौर करें तो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर फरवरी, 2018 में 4.44 फीसदी (अनंतिम) आंकी गई है, जो फरवरी, 2017 में 3.65 फीसदी (अंतिम) थी। वहीं, सीपीआई पर आधारित महंगाई दर जनवरी, 2018 में 5.07 फीसदी (अंतिम) थी। इसी तरह यदि शहरी एवं ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों पर समग्र रूप से गौर करें तो उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) पर आधारित महंगाई दर फरवरी, 2018 में 3.26 फीसदी (अनंतिम) रही है, जो फरवरी, 2017 में 2.01 फीसदी (अंतिम) थी। वहीं, सीएफपीआई पर आधारित महंगाई दर जनवरी, 2018 में 4.70 फीसदी (अंतिम) थी।

-सांख्‍यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्‍वयन मंत्रालय के केन्‍द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक (सीपीआई) के लिए आधार वर्ष को 2010=100 से संशोधित करके 2012=100 कर दिया है।

जिस कीमत पर उपभोक्ताओं को वस्तुएं या सेवाएं प्राप्त होती हैं, उसे ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) कहते हैं। केंद्रीय एजेंसी कीमतों के मामले में कई सूचकांक की गणना करती हैं, जिनमें उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) भी एक है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के कई उपयोग होते हैं। इसका उपयोग तनख्वाह और महंगाई भत्तों के निर्धारण के साथ ही यह देखने के लिए भी किया जा सकता है कि देश के लोगों पर महंगाई का बोझ कितना है। इससे इस बात का अनुमान भी लगाया जा सकता है कि महंगाई किस क्षेत्र में ज्यादा बढ़ रही है।

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