केन्द्रीय सूचना आयोग

बिमल जुल्का बने नए मुख्य सूचना आयुक्त

बिमल जुल्का को केन्द्रीय सूचना आयोग का अगला मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया  गया है। इससे पहले वे सूचना आयुक्त के रूप में कार्यरत्त थे। इससे पहले वे सूचना व प्रसारण सचिव के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में बिमल जुल्का को पद की शपथ दिलाई। पिछले मुख्य सूचना आयुक्त सुधीर भार्गव 11 जनवरी को सेवानिवृत्त हुए थे।

 केन्द्रीय सूचना आयोग

केन्द्रीय सूचना आयोग की स्थापना केंद्र सरकार ने वर्ष 2005 में सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI), 2005 के तहत की गयी थी। स्वस्थ लोकतंत्र के शासन सम्बन्धी कार्यों में पारदर्शिता बनाये रखने में इस आयोग की भूमिका अति महत्वपूर्ण है। इसके द्वारा भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, दमन तथा सत्ता के दुरूपयोग को रोका जा सकता है।

केन्द्रीय सूचना आयोग किसी भी व्यक्ति से प्राप्त शिकायत की जांच कर सकता है। मुख्य आयुक्त द्वारा संन्य  अधीक्षण, निर्देशक तथा आयोग के प्रबंधन का कार्य किया जाता है, मुख्य सूचना आयुक्त की सहायता के लिए सूचना आयुक्त होते हैं। केन्द्रीय सूचना आयोग अपनी सूचना का अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन सम्बन्धी वार्षिक रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपता है। यह आयोग अपनी रिपोर्ट को संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत करता है।

केन्द्रीय सूचना आयोग की शक्तियां व कार्य

  • यह किसी भी तर्कसंगत मामले की छानबीन के आदेश दे सकता है।
  • यह सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा निर्णय निर्माण सुनिश्चित करवाता है।
  • यदि सार्वजनिक प्राधिकरण RTI अधिनियम के मुताबिक कार्य नहीं करता, तो यह आयोग समन्वय को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अनुशंसा कर सकता है।
  • यह किसी व्यक्ति से शिकायत प्राप्त कर सकता है तथा उस शिकायत की जांच करवा सकता है।
  • यह अपने अंतर्गत किसी भी सरकारी कार्यालय के रिकॉर्ड की छानबीन कर सकता है। जांच-पड़ताल के दौरान इस आयोग के पास सिविल कोर्ट की शक्ति होती है।

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बिमल जुल्का होंगे अगले मुख्य सूचना आयुक्त

बिमल जुल्का को केन्द्रीय सूचना आयोग का अगला मुख्य सूचना आयुक्त चुना गया है। वे वर्तमान में सूचना आयुक्त के रूप में कार्यरत्त हैं। इससे पहले वे सूचना व प्रसारण सचिव के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

 केन्द्रीय सूचना आयोग

केन्द्रीय सूचना आयोग की स्थापना केंद्र सरकार ने वर्ष 2005 में सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI), 2005 के तहत की गयी थी। स्वस्थ लोकतंत्र के शासन सम्बन्धी कार्यों में पारदर्शिता बनाये रखने में इस आयोग की भूमिका अति महत्वपूर्ण है। इसके द्वारा भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, दमन तथा सत्ता के दुरूपयोग को रोका जा सकता है।

केन्द्रीय सूचना आयोग किसी भी व्यक्ति से प्राप्त शिकायत की जांच कर सकता है। मुख्य आयुक्त द्वारा संन्य  अधीक्षण, निर्देशक तथा आयोग के प्रबंधन का कार्य किया जाता है, मुख्य सूचना आयुक्त की सहायता के लिए सूचना आयुक्त होते हैं। केन्द्रीय सूचना आयोग अपनी सूचना का अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन सम्बन्धी वार्षिक रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपता है। यह आयोग अपनी रिपोर्ट को संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत करता है।

केन्द्रीय सूचना आयोग की शक्तियां व कार्य

  • यह किसी भी तर्कसंगत मामले की छानबीन के आदेश दे सकता है।
  • यह सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा निर्णय निर्माण सुनिश्चित करवाता है।
  • यदि सार्वजनिक प्राधिकरण RTI अधिनियम के मुताबिक कार्य नहीं करता, तो यह आयोग समन्वय को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अनुशंसा कर सकता है।
  • यह किसी व्यक्ति से शिकायत प्राप्त कर सकता है तथा उस शिकायत की जांच करवा सकता है।
  • यह अपने अंतर्गत किसी भी सरकारी कार्यालय के रिकॉर्ड की छानबीन कर सकता है। जांच-पड़ताल के दौरान इस आयोग के पास सिविल कोर्ट की शक्ति होती है।

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