के. सिवान

डॉ. के. सिवान ने इंटरनेशनल अकैडमी ऑफ एस्ट्रोनॉटिक्स का 2020 वॉन कर्मन पुरस्कार जीता

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष डॉ. कैलासादिवु सिवान को 2020 वॉन कर्मन पुरस्कार के प्राप्तकर्ता के रूप में नामित किया गया है। यह पुरस्कार इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एस्ट्रोनॉटिक्स (IAA) द्वारा गठित किया गया था और मार्च 2021 में पेरिस में प्रदान किया जाएगा। इसका नाम एयरोस्पेस इंजीनियर और वायुगतिकी विशेषज्ञ थियोडोर वॉन कर्मन के नाम पर रखा गया है। के. सिवान , कस्तूरीरंगन और यू.आर. राव के बाद यह पुरस्कार पाने वाले केवल तीसरे भारतीय हैं।

के. सिवान

के. सिवान तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले से हैं। उन्होंने मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से 1980 में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस, बंगलुरु से मास्टर डिग्री प्राप्त की थी। इसके बाद वे इसरो में शामिल हुए थे।  उन्होंने विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर एंड लिक्विड प्रोपल्शन सेंटर के निर्देशक के रूप में कार्य किया है। उन्होंने इसरो के लांच व्हीकल के डिजाईन व विकास में कार्य किया है। उनके नेतृत्व में GSLV ने स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन के साथ उड़ान भरी थी। उनके कार्यकाल में ही चंद्रयान-2 मिशन को लांच किया गया। उन्हें 1999 में डॉ. विक्रम साराभाई रिसर्च अवार्ड से सम्मानित किया गया था।

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तमिलनाडु ने इसरो प्रमुख को  डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम अवार्ड से सम्मानित किया

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन के प्रमुखक डॉ. के सिवान को तमिलनाडु सरकार ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम अवार्ड से सम्मानित किया, उन्हें यह सम्मान विज्ञान व तकनीक को बढ़ावा देने के लिए किये गये कार्य के लिए दिया गया है।

के. सिवान

के. सिवान तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले से हैं। उन्होंने मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से 1980 में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस, बंगलुरु से मास्टर डिग्री प्राप्त की थी। इसके बाद वे इसरो में शामिल हुए थे।  उन्होंने विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर एंड लिक्विड प्रोपल्शन सेंटर के निर्देशक के रूप में कार्य किया है। उन्होंने इसरो के लांच व्हीकल के डिजाईन व विकास में कार्य किया है। उनके नेतृत्व में GSLV ने स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन के साथ उड़ान भरी थी। उनके कार्यकाल में ही चंद्रयान-2 मिशन को लांच किया गया। उन्हें 1999 में डॉ. विक्रम साराभाई रिसर्च अवार्ड से सम्मानित किया गया था।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम अवार्ड

2015 में डॉ. अब्दुल कलाम के निधन के बाद तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने डॉ. कलाम के सम्मान में पुरस्कार की घोषणा की थी। यह पुरस्कार विज्ञान, मानविकी तथा छात्र कल्याण के क्षेत्र में प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार तमिलनाडु के वासियों को प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार के विजेता को 8 ग्राम का स्वर्ण पदक, पांच लाख रुपये तथा एक प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार सर्वप्रथम इसरो के वैज्ञानिक एन. वालारमति को 2015 में प्रदान किया गया था।

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