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एशियाई विकास बैंक और भारत सरकार ने ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए।

एशियाई विकास बैंक और भारत सरकार ने रेलवे की परिचालन क्षमता को बेहतर करने के लिए भीड़-भाड़ वाले गलियारों से सटे रेल‍वे की पटरियों को दोहरी लाइन में तब्‍दील करने तथा वि़द्युतीकरण से संबंधित कार्यों को पूरा करने के लिए 120 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस राशि का उपयोग पूर्ववर्ती किस्‍तों के तहत शुरू किये गये कार्यों को पूरा करने में किया जाएगा। ऋण की यह तीसरी किस्‍त स्‍वीकृत वर्ष 2011 में एडीबी के बोर्ड द्वारा किये गये रेल क्षेत्र निवेश कार्यक्रम से जुड़ी 500 मिलियन डॉलर की बहु-किस्‍त वित्‍त पोषण सुविधा का एक हिस्‍सा है।

इस परियोजना का उद्देश्‍य

देश में महत्‍वपूर्ण मार्गों पर रेल लाइनों के विद्युतीकरण , दोहरीकरण और आधुनिक सिग्‍नलिंग प्रणाली को स्‍थापित कर रेलवे की बुनियादी ढांचागत सुविधाओं की क्षमता को बढ़ाना है। इससे कम ऊर्जा खपत, सुरक्षित और विश्‍वसनीय रेल प्रणाली विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे परियोजना के तहत आने वाले रेल रूटों पर सफर की अवधि घटाने में मदद मिलेगी और बेहतर परिचालनगत एवं वित्‍तीय दक्षता सुनिश्चित होगी।

इससे छत्‍तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्‍ट्र, कर्नाटक और आन्‍ध्र प्रदेश के व्‍यस्‍त माल एवं यात्री ढुलाई वाले रूटों को लक्षित किया जा रहा है, जिसमें ‘स्वर्णिम चतुर्भुज’ गलियारा शामिल है, जो चेन्‍नई, कोलकाता, मुम्‍बई और नई दिल्‍ली को आपस में जोड़ता हैं। रेल खंडों का दोहरीकरण दौंड-टिटलागढ़ खंड, संबलपुर-टिटलागढ़ खंड, रायपुर-टिटलागढ़ खंड और हॉस्पेट-टिनाइघाट खंड पर किया जा रहा है, विद्युतीकरण का कार्य 641 किलोमीटर लंबे पुणे-वाडी गुंटाकल खंड पर किया जा रहा है।

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