कौशल विकास

पूर्वोत्तर के लिए नीति फोरम की पहली बैठक त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में आयोजित हुई

‘पूर्वोत्तर के लिए नीति फोरम’ की पहली बैठक त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में हुई. बैठक में नागालैण्ड,त्रिपुरा और मेघालय के मुख्यमंत्रियों के अलावा नीति आयोग और केन्द्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया. नियमित गतिविधियों से अलग इस क्षेत्र के संपूर्ण विकास के लिए नए विचार और दृष्टिकोण को देखना नीति फोरम शुरू करने का उद्देश्य है.

मुख्य तथ्य

• बागवानी, पर्यटन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए पांच विकास मिशनों को नीति फोरम की पहली बैठक में रेखांकित किया गया.

• विकास परियोजनाएं “एचआईआरए” (HIRA) पर आधारित होगी जिसका अर्थ है, हाइवेज़, इंटरनेटवेज़, रेलवेज़ और एयरवेज़.

• शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर इस क्षेत्र में भी ध्यान दिया जाएगा.

• उड़ान योजना भी इस क्षेत्र में लागू की जा रही है जिसके माध्यम से राज्य की राजधानियां एक-दूसरे से जुड़ी रहेंगी.

• सरकार ने एक निजी एयरलाइन के साथ त्रिपुरा की राजधानी अगरतला को बांग्लादेश की राजधानी ढाका और चिटगांव से हवाई सेवा से जोड़ने के लिए बातचीत शुरू की है.

• बांग्लादेश तथा त्रिपुरा को जोड़ने वाली प्रस्तावित रेल लाइन पर भी चर्चा की गई. अगरतला से बांग्लादेश के गंगासागर तक यह रेल लिंक बनाया जा रहा है.

पूर्वोत्तर के लिए नीति फोरम

फरवरी 2018 में केन्द्र सरकार ने पूर्वोत्तर के लिए नीति फोरम की स्थापना की थी. इसकी सह-अध्यक्षता नीति आयोग के उपाध्यक्ष और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) को सौंपी गई. पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय में फोरम का सचिवालय घोषित किया गया. विकास कार्यों में आने वाली अड़चनों की पहचान करना तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र में तेज एवं सतत विकास के लिए आवश्यक कदमों की सिफारिश करना फोरम का कार्य है. सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय, रेल मंत्रालय, बिजली मंत्रालय, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव फोरम के सदस्यों में शामिल हैं. इनके अलावा पूर्वोत्तर राज्यों असम, सिक्किम, नगालैंड, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा, अरूणाचल प्रदेश और मिजोरम के मुख्य सचिव भी फोरम के सदस्य निर्धारित किये गये हैं

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नीति आयोग द्वारा जारी सूची में नूहं देश के सबसे पिछड़े ज़िले के रूप में सूचीबद्ध किया गया

नीति आयोग द्वारा एक सूची जारी की गई है जिसमें विकास के नज़रिये से देश के सबसे पिछड़े ज़िलों का उल्लेख किया गया है। हरियाणा के नूहं (मेवात) को देश के सबसे पिछड़े ज़िले के रूप में इस सूची में सूचीबद्ध किया गया है।

मुख्य तथ्य

– तेलंगाना के आसिफाबाद, मध्य प्रदेश के सिंगरौली, नगालैंड के किफिरे और उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती ज़िले को देश के सबसे पिछड़े पाँच ज़िलों में इसके बाद शामिल किया गया है।
-आपसी प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाकर विकास के लिये इन ज़िलों को प्रोत्साहित करना इस रैंकिंग का उद्देश्य है।
-शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण, कृषि, जल संसाधन, आधारभूत बुनियादी ढाँचे वित्तीय समावेशन तथा कौशल विकास जैसे क्षेत्रों के 49 विकास मानकों के आधार पर देश के 101 पिछड़े ज़िलों की रैंकिंग आयोग द्वारा की गई। इन ज़िलों को ‘आकांक्षापूर्ण ज़िले’ नाम दिया गया।
-केंद्र एवं राज्य की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रभारी संयुक्त सचिव एवं अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारियों को इन ज़िलों में नियुक्त किया गया।
-मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति राज्य स्तर पर की जाएगी।
-नीति आयोग द्वारा “चैम्पियंस ऑफ चेंज” नाम से एक ऑनलाइन डैशबोर्ड भी तैयार किया जा रहा है जिसके माध्यम से इन ज़िलों की रैंकिंग में आने वाले उतार-चढ़ाव के संबंध में ऑनलाइन रैंकिंग की जा सके।

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