खगोलशास्त्र

थानु पद्मनाभन ने जीता एम.पी. बिरला मेमोरियल अवार्ड

62 वर्षीय भौतिकशास्त्री व खगोलशास्त्री थानु पद्मनाभन को हाल ही में एम.पी. बिरला मेमोरियल अवार्ड प्रदान किया गया। उन्हें यह सम्मान खगोल विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया जा रहा है।

थानु पद्मनाभन

थानु पद्मनाभन पुणे की इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स में प्रोफेसर हैं। इससे पहले उन्हें शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार तथा पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने सापेक्षता, गुरुत्वाकर्षण तथा खगोलशास्त्र के क्षेत्र में कार्य किया। वे IISER (मोहाली), IISER (त्रिवेंद्रम) तथा जामिया मिलिया इस्लामिया से भी जुड़े हुए है।

एम.पी. बिरला मेमोरियल अवार्ड

एम.पी. बिरला मेमोरियल अवार्ड की स्थापना 1993 में की गयी थी, यह अवार्ड अन्तरिक्ष विज्ञान, खगोल-भौतिकी तथा खगोल विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के लिए दिया जाता है। इस पुरस्कार के विजेता को एक ट्रॉफी  तथा 2,51,000 रुपये प्रदान किये जाते हैं।

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ब्लड मून 2018 : सदी का सबसे लम्बा चंद्रग्रहण 1 घंटा 43 मिनट तक देखा गया

21वीं सदी (वर्ष 2001 से 2100 तक) का सबसे लम्बा चन्द्रग्रहण 27 जुलाई 2018 को 1 घंटा 43 मिनट तक देखा गया। यह अति दुर्लभ खगोलीय घटना भारत के अधिकतर हिस्सों में देखी गयी। इस चन्द्रग्रहण को पूर्वी गोलार्ध के मध्य एशिया, पूर्वी अफ्रीका और दक्षिण पूर्वी एशिया में देखा गया। आंशिक चंद्रग्रहण 27 जुलाई 2018 को शुरू हुआ। धीरे-धीरे चन्द्रमा, पृथ्वी की परछाई से ढक गयी। पूर्ण फेज़ 28 जुलाई को देखा गया। चन्द्रमा पृथ्वी की परछाई से बाहर 28 जुलाई, 2018 को आया।

सबसे लम्बा चन्द्रग्रहण

इस चंद्रग्रहण के दौरान चन्द्रमा पृथ्वी के केन्द्रीय भाग की परछाई से होकर गुज़रा। इस दौरान चन्द्रमा पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी पर स्थित था, इस कारण इसकी गति काफी धीमी थी। इस प्रकार चन्द्रमा को पृथ्वी की परछाई से बाहर आने में काफी समय लगा, और यह सदी का सबसे लम्बा चंद्रग्रहण बन गया। इस प्रकार का एक चंद्रग्रहण 16 जुलाई, 2000 को देखा गया था, इसकी अवधि 1 घंटा 46 मिनट थी। जबकि 15 जून, 2011 को एक अन्य चन्द्रग्रहण की अवधि 1 घंटा और 40 मिनट थी।

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