गाँधी जयंती

महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती के अवसर पर 150 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया गया

महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2 अक्टूबर को गुजरात के अहमदबाद में साबरमती आश्रम में 150 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया। साबरमती आश्रम से गांधीजी ने स्वतंत्रता आन्दोलन से सम्बंधित गतिविधियों का संचालन किया था।

मुख्य बिंदु

कुछ दिन पहले संयुक्त राष्ट्र ने गांधीजी की 150वीं जयंती के लिए एक विशेष डाक टिकट जारी किया था।

इस वर्ष प्रधानमंत्री मोदी ने गुरु गोबिंद सिंह जी जयंती पर 350 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया था। 2018 में अटल बिहारी वाजपेयी जी के सम्मान में 100 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया गया था।

स्मारक सिक्के

स्मारक सिक्के किसी विशेष इवेंट अथवा व्यक्ति की जयंती के अवसर पर जारी किये जाते हैं। इन सिक्कों का डिजाईन आम सिक्कों की तुलना में काफी भिन्न होता है। यह सिक्के केवल कुछ ही समय के लिए जारी किये जाते हैं। यह सिक्के लीगल टेंडर होते हैं, इनसे वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं। भारत में पहली बार पंडित जवाहलाल नेहरु की स्मृति में 1964 में स्मारक सिक्के जारी किये गये थे।

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आज मनाई जा रही है महात्मा गाँधी की 150वीं वर्षगाँठ

भारत में 2 अक्टूबर को गाँधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष महात्मा गाँधी की 150वीं जन्म वर्षगाँठ है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा अन्य गणमान्य नेताओं ने राजघाट में गांधीजी को श्रद्धांजली अर्पित की।

मोहनदास करमचंद गाँधी

मोहनदास करमचंद गाँधी को महात्मा गांधी के नाम से जाना जाता है, उन्होंने भारत की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनका जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को ब्रिटिश भारत की बॉम्बे प्रेसीडेंसी के पोरबंदर में हुआ था। उनकी हत्या 30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गोडसे द्वारा की गयी थी।

स्वतंत्रता आन्दोलन में उनके निस्वार्थ योगदान के लिए गांधीजी को “बापू” भी कहा जाता है। उन्हें अनाधिकारिक रूप से “राष्ट्रपिता” भी कहा जाता है। उन्होंने लन्दन में कानून की पढाई की थी, तत्पश्चात वे भारत लौटे, बाद में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में एक भारतीय फर्म में कार्य किया।

गांधीजी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे और वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए। भारत में उन्होंने कई सामाजिक कार्यों तथा स्वराज प्राप्त करने के लिए कार्य किया। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध के द्वारा ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आवाज़ उठाई। उन्होंने स्वतंत्रता के लिए सत्याग्रह तथा असहयोग आन्दोलन का उपयोग किया। ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध गांधीजी के विरोध में असहयोग आन्दोलन और दांडी यात्रा प्रमुख है, इससे ब्रिटिश सरकार को काफी धक्का लगा।

गांधीजी ने अपने जीवन को सरलता और सदाचार से जीया और वे पारंपरिक भारतीय परिधान धोती और शाल ही पहनते थे। राजनीतिक विरोध प्रकट करने तथा स्वयं के शुद्धिकरण लिए वे अनशन करते थे। उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।

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