गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजिनियर्स

भारतीय नौसेना को सौंपी गयी आईएनएस कवरत्ती

कलकत्ता बेस्ड सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ने नौसेना को आईएनएस कवरत्ती नामक पनडुब्बी रोधी स्टेल्थ युद्धपोत डिलीवर कर दी है। आईएनएस कवरत्ती भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट P28 के तहत डिलीवर की जाने वाली चौथी व अंतिम पनडुब्बी है। पहली तीन पनडुब्बियों के नाम हैं : कमोर्ता, कद्मत्त तथा किल्टन (यह लक्षद्वीप समूह के द्वीपों के नाम हैं)। इन तीन पनडुब्बियों को 2014 से 2017 के बीच डिलीवर किया गया था। कवरत्ती युद्ध पोत के 90% पुर्ज़े स्वदेशी हैं।

गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजिनियर्स (GRSE)

  • यह सार्वजनिक क्षेत्र का एक रक्षा उपक्रम है, भारत के अग्रणी सरकारी शिपबिल्डर्स में से एक है, यह पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में स्थित है। यह वाणिज्यिक तथा नौसैनिक वेसल का निर्माण व मरम्मत करता है। अब यह निर्यात जहाजों का निर्माण भी कर रहा है।
  • इसकी स्थापना 1884 में हुगली नदी के किनारे एक छोटी निजी कंपनी के रूप में हुई थी। 1916 में इसका नाम बदलकर गार्डन रीच वर्कशॉप रखा गया था। वर्ष 1960 में सरकार द्वारा इसका राष्ट्रीयकरण किया गया।
  • GRSE एक “मिनीरत्न” है। यह 100 युद्धपोत निर्मित करने वाला पहला भारतीय शिपयार्ड है। यह वर्तमान में P17A प्रोजेक्ट के तहत भारतीय नौसेना के लिए 3 स्टेल्थ फ्रिजेट्स का निर्माण कर रहा है।
  • GRSE द्वारा निर्मित 100 युद्धपोतों में एडवांस्ड फ्रिजेट्स, एंटी-सबमरीन वॉरफेयरक कार्वेट से लेकर फ्लीट टैंकर तक शामिल है।

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भारतीय नौसेना को शीघ्र सौंपी जायेगी आईएनएस कवरत्ती

कलकत्ता बेस्ड सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स नौसेना को आईएनएस कवरत्ती नामक पनडुब्बी रोधी स्टेल्थ युद्धपोत डिलीवर करेगी। आईएनएस कवरत्ती भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट P28 के तहत डिलीवर की जाने वाली चौथी व अंतिम पनडुब्बी है। पहली तीन पनडुब्बियों के नाम हैं : कमोर्ता, कद्मत्त तथा किल्टन (यह लक्षद्वीप समूह के द्वीपों के नाम हैं)। इन तीन पनडुब्बियों को 2014 से 2017 के बीच डिलीवर किया गया था। कवरत्ती युद्ध पोत के 90% पुर्ज़े स्वदेशी हैं।

गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजिनियर्स (GRSE)

  • यह सार्वजनिक क्षेत्र का एक रक्षा उपक्रम है, भारत के अग्रणी सरकारी शिपबिल्डर्स में से एक है, यह पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में स्थित है। यह वाणिज्यिक तथा नौसैनिक वेसल का निर्माण व मरम्मत करता है। अब यह निर्यात जहाजों का निर्माण भी कर रहा है।
  • इसकी स्थापना 1884 में हुगली नदी के किनारे एक छोटी निजी कंपनी के रूप में हुई थी। 1916 में इसका नाम बदलकर गार्डन रीच वर्कशॉप रखा गया था। वर्ष 1960 में सरकार द्वारा इसका राष्ट्रीयकरण किया गया।
  • GRSE एक “मिनीरत्न” है। यह 100 युद्धपोत निर्मित करने वाला पहला भारतीय शिपयार्ड है। यह वर्तमान में P17A प्रोजेक्ट के तहत भारतीय नौसेना के लिए 3 स्टेल्थ फ्रिजेट्स का निर्माण कर रहा है।
  • GRSE द्वारा निर्मित 100 युद्धपोतों में एडवांस्ड फ्रिजेट्स, एंटी-सबमरीन वॉरफेयरक कार्वेट से लेकर फ्लीट टैंकर तक शामिल है।

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