गुट निरपेक्ष आंदोलन

भारत ने NAM स्वास्थ्य मंत्री बैठक में हिस्सा लिया

20 मई, 2020 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) में भाग लिया।

मुख्य बिंदु

इस  सम्मेलन की अध्यक्षता अजरबैजान के स्वास्थ्य मंत्री ओगेटे शिरालिएव ने की। इस शिखर सम्मेलन में भारत ने 123 देशों में चिकित्सा आपूर्ति जैसे अपने योगदान पर प्रकाश डाला। इसमें 59 NAM देश भी शामिल हैं।  इस बैठक में मंत्री ने भारत के विभिन्न स्वास्थ्य उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस तथ्य पर भी जोर दिया कि भारत बड़े पैमाने पर आइसोलेशन, माइक्रो आइडेंटिफिकेशन और त्वरित उपचार की नीति का अनुसरण करता है। भारत अब 10,000 COVID-19 समर्पित अस्पतालों का संचालन कर रहा है।

गुट निरपेक्ष आंदोलन (NAM – Non-Aligned Movement)

गुट निरपेक्ष आंदोलन की आन्दोलन 1961 में बेलग्रेड में की गयी थी, इसमें भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु तथा यूगोस्लाविया के राष्ट्रपति जोसिप ब्रोज़ टिटो ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह शीत युद्ध के दौरान अस्तित्व में आया था, इसका उद्देश्य नव स्वतंत्र देशों को किसी गुट (अमेरिका व सोवियत संघ) में शामिल होने के बजाय तटस्थ रखना था। गुट निरपेक्ष आन्दोलन के 120 सदस्य तथा 17 पर्यवेक्षक हैं।

गुट निरपेक्ष आंदोलन के सिद्धांत

गुट निरपेक्ष आंदोलन के पांच प्रमुख सिद्धांतों में परस्पर सम्मान, आपसी गैर-आक्रामकता, समानता और पारस्परिक लाभ, घरेलू मामलों में आपसी गैर-हस्तक्षेप और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व शामिल हैं।

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भारत ने NAM शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया

4 मई, 2020 को प्रधानमंत्री मोदी ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शिखर सम्मेलन में भाग लिया। इस शिखर सम्मेलन में COVID-19 से सम्बंधित चुनौतियों और समाधानों पर चर्चा की जायेगी।

मुख्य बिंदु

2014 में प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद श्री मोदी ने इस वर्ष पहली बार NAM शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। 2016 में यह शिखर सम्मेलन वेनेजुएला और 2019 में अजरबैजान में आयोजित किया गया था।  2012 में, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने तेहरान NAM शिखर सम्मेलन में भाग लिया।

गुट निरपेक्ष आंदोलन (NAM – Non-Aligned Movement)

गुट निरपेक्ष आंदोलन की आन्दोलन 1961 में बेलग्रेड में की गयी थी, इसमें भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु तथा यूगोस्लाविया के राष्ट्रपति जोसिप ब्रोज़ टिटो ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह शीत युद्ध के दौरान अस्तित्व में आया था, इसका उद्देश्य नव स्वतंत्र देशों को किसी गुट (अमेरिका व सोवियत संघ) में शामिल होने के बजाय तटस्थ रखना था। गुट निरपेक्ष आन्दोलन के 120 सदस्य तथा 17 पर्यवेक्षक हैं।

गुट निरपेक्ष आंदोलन के सिद्धांत

गुट निरपेक्ष आंदोलन के पांच प्रमुख सिद्धांतों में परस्पर सम्मान, आपसी गैर-आक्रामकता, समानता और पारस्परिक लाभ, घरेलू मामलों में आपसी गैर-हस्तक्षेप और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व शामिल हैं।

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