ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम

फ्रांस के शोधकर्ताओं ने बिना जीपीएस की सहायता से चींटी की तरह चलने वाले रोबोट का विकास किया

फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च (CNRS) के शोधकर्ताओं ने ही चींटी की तरह चलने वाले “AntBot” का विकास किया है, यह अपने आसपास के माहौल में खोजबीन कर सकता है और बिना जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) की सहायता से घर तक वापस आ सकता है।

AntBot

इसके लिए वैज्ञानिकों ने मरुस्थलीय चींटियों से प्रेरणा ली, जो अकेले ही यात्रा करती हैं। चींटियाँ अपनी अवस्थिति पता करने के लिए ध्रुवीय रौशनी तथा पराबैगनी रौशनी का उपयोग करती हैं। यह AntBot भी इन चींटियों की तरह की कार्य करता है। इस छह टांग वाले रोबोट में ऑप्टिकल कंपास है, जिसकी सहायता से यह ध्रुवीय रौशनी का पता लगाकर अपनी दिशा निश्चित करता है। इसमें सूर्य की दिशा में ऑप्टिकल मूवमेंट सेंसर लगा है, जिससे यह तय की गयी दूरी की गणना करता है।

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चीन ने बेईदोउ (एमईओ-3) के तहत बेईदोउ-30 तथा बेईदोउ-31 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया

चीन ने अपने घरेलू बेईदोउ (कम्पास) उपग्रह नेविगेशन प्रणाली को लॉन्च करने के अपने तीसरे और अंतिम चरण के रूप में बेईदोउ -30 और बेईदोउ-31 के बेईदोउ (एमईओ-3) उपग्रहों को सफलतापूर्वक लौंच किया है । दक्षिण पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत के झिचांग सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से लॉन्ग मार्च -3 बी वाहक रॉकेट पर उन्हें लॉन्च किया गया । यह लांग मार्च रॉकेट समूह का 269 वां मिशन था

बेईदोउ उपग्रह नेविगेशन प्रणाली

‘बेईदोउ’ उपग्रह नेविगेशन परियोजना को औपचारिक रूप से वर्ष 1994 में शुरू किया गया था | चीन की योजना वर्ष 2018 तक बेईदोउ सेवा का विस्तार “बेल्ट एंड रोड” परियोजना के आसपास के देशों में करने की है |

बेईदोउ प्रणाली में 30 उपग्रह होंगे और इसे 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य है | यह उपग्रह प्रणाली अमेरिका के ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम, रूस के ग्लोनास, और यूरोप के गैलीलियो नेविगेशन उपग्रह प्रणाली का समकक्ष होगा बेईदोउ वर्तमान में चीन के भीतर नेविगेशन और पड़ोसी क्षेत्रों को सेवा प्रदान कर रहा है | इसके नामित ग्रहपथ में प्रस्थापित होते ही यह दुसरे स्थापित उपग्रहों में शामिल हो जाएगा |

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