चंद्रयान-2

आज के मुख्य करेंट अफेयर्स समाचार :  4 दिसम्बर, 2019

प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण 4 दिसम्बर, 2019 के मुख्य समाचार निम्नलिखित हैं :

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स   

  • दमन व दिउ तथा दादरा नगर व हवेली के विलय के लिए संसद ने बिल पारित किया।
  • भारत ने पृथ्वी-II मिसाइल का परीक्षण किया।
  • ‘भारतीय पोषण एंथम’ जारी किया गया।
  • दिव्यांगजनों के पुनर्वास के लिए उत्तर प्रदेश ने जीता नेशनल अवार्ड ऑफ़ एक्सीलेंस।
  • भारत और स्वीडन मिलकर भर में हेल्थकेयर इनोवेशन सेंटर की स्थापना करेंगे।
  • FSSAI ने मुंबई सेंट्रल को देश का प्रथम ‘ईट राईट स्टेशन’ प्रमाणित किया।

व्यापारिक व आर्थिक करेंट अफेयर्स

  • सरकार ने थोक में प्याज के भण्डारण की सीमा को 25 टन से घटाकर 5 टन किया।
  • शाओमी ने भारत में लांच किया Mi Credit, इसके तहत एक लाख रुपये तक का पर्सनल लोन दिया जाएगा

अंतर्राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स

  • नासा ने चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का मलबा ढूँढा।
  • 3 दिसम्बर को मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस।
  • यूनाइटेड किंगडम में वाटफोर्ड में किया जा रहा है 2019 नाटो शिखर सम्मेलन का आयोजन।

खेल कूद करेंट अफेयर्स

  • न्यूजीलैंड के क्रिस्टोफर मार्टिन-जेन्किन्स ने जीता स्पिरिट ऑफ़ क्रिकेट अवार्ड 2019।
  • अर्जेंटीना के फुटबॉलर लियोनेल मेसी ने फुटबॉल का प्रतिष्ठित सम्मान बैलन डी ऑर जीता।
  • महिला वर्ग में अमेरिका की मीगन रेपिनो ने  बैलन डी ऑर जीता।

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नासा ने चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम’ को खोज निकाला

अमेरिकी अन्तरिक्ष एजेंसी नासा के उपग्रह ने चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम’ को ढूंढ लिया है। नासा ने ‘विक्रम’ के लैंडिंग स्थान का चित्र जारी किया है। यह चित्र नासा के Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) द्वारा लिया गया है।

नासा द्वारा जारी किया गया चित्र

चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम’ का संपर्क इसरो के ग्राउंड स्टेशन से लैंडिंग से ठीक पहले टूट गया था। जब यह संपर्क टूटा उस समय  ‘विक्रम’ चन्द्रमा की सतह से मात्र 2.1 किलोमीटर ऊपर था।

मिशन चंद्रयान-2

चंद्रयान-2 भारत का चंद्रमा पर दूसरा मिशन है, यह भारत का अब तक का सबसे मुश्किल मिशन है। यह 2008 में लांच किये गए मिशन चंद्रयान का उन्नत संस्करण है। चंद्रयान मिशन ने केवल चन्द्रमा की परिक्रमा की थी, परन्तु चंद्रयान-2 मिशन में चंद्रमा की सतह पर एक रोवर भी उतारा जाना था।

इस मिशन के सभी हिस्से इसरो ने स्वदेश रूप से भारत में ही बनाये हैं, इसमें ऑर्बिटर, लैंडर व रोवर शामिल है। इस मिशन में इसरो पहली बार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड रोवर को उतारने की कोशिश की। यह रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके चन्द्रमा की सतह के घटकों का विश्लेषण करने के लिए निर्मित किया गया था।

चंद्रयान-2 को GSLV Mk III से लांच किया गया। यह इसरो का ऐसा पहला अंतर्ग्रहीय मिशन है, जिसमे इसरो ने किसी अन्य खगोलीय पिंड पर रोवर उतारने का प्रयास किया। इसरो के स्पेसक्राफ्ट (ऑर्बिटर) का वज़न 3,290 किलोग्राम है, यह स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा की परिक्रमा करके डाटा एकत्रित करेगा, इसका उपयोग मुख्य रूप से रिमोट सेंसिंग के लिए किया जा रहा है।

6 पहिये वाला रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके मिट्टी व चट्टान के नमूने इकठ्ठा करने के लिए बनाया गया था, इससे चन्द्रमा की भू-पर्पटी, खनिज पदार्थ तथा हाइड्रॉक्सिल और जल-बर्फ के चिन्ह के बारे में जानकारी मिलने की सम्भावना थी।

चन्द्रमा की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग करना इस मिशन का सबसे कठिन हिस्सा था, अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ही यह कारनामा कर पाए हैं। इजराइल का स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा पर क्रेश हो गया था।

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