चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर

पाकिस्तान और चीन ने पाक-अधिकृत कश्मीर में जलविद्युत परियोजना के लिए 2.4 अरब डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किये

25 जून, 2020 को  1124 मेगावाट कोहाला जल विद्युत परियोजना के निर्माण के लिए एक त्रिपक्षीय उर्जा खरीद समझौते (TPPA) पर  हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते पर पाकिस्तान सरकार, चीनी कंपनी- चाइना थ्री गोरजेस कॉर्पोरेशन (चीनी सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी) और आज़ाद कश्मीर सरकार (पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का हिस्सा) के बीच समझौता हुआ है।

कोहाला जलविद्युत परियोजना

यह परियोजना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद जिले के सिरन और बरसला के गांवों के पास स्थित है। यह जल विद्युत परियोजना झेलम नदी पर स्थित है।

यह परियोजना चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का हिस्सा है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 2,364 मिलियन डालर है और 2026 तक इसके पूरा होने की उम्मीद है। इस हाइड्रो पावर प्लांट का निर्माण कोहाला हाइड्रोपावर कंपनी लिमिटेड (KHCL) द्वारा किया जाएगा। KHCL चाइना थ्री गोरजेस कॉर्पोरेशन की सहायक कंपनी है।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर

चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का हिस्सा है, इसका उद्देश्य विश्व भर में अधोसंरचना प्रोजेक्ट्स को फंडिंग प्रदान करके चीनी प्रभाव में वृद्धि करना है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर में परिवहन नेटवर्क, उर्जा परियोजनाओं, ग्वादर बन्दरगाह तथा विशेष आर्थिक क्षेत्रों का निर्माण किया जायेगा, इसका उद्देश 2030 तक पाकिस्तान को विनिर्माण हब में रूप में स्थापित करना है। पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिम में ग्वादर को चीन के शिनजियांग से रेल व उच्चमार्ग के द्वारा जोड़ा जायेगा। इस प्रोजेक्ट के लिए चीन ने पाकिस्तान को भारी मात्रा में ऋण उपलब्ध करवाया है। यह ऋण चाइना डेवलपमेंट बैंक, एक्सिम बैंक ऑफ़ चाइना तथा इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ़ चाइना द्वारा दिए गये हैं।

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सऊदी अरब बनेगा चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर का तीसरा सामरिक साझेदार

पाकिस्तान ने सऊदी अरब को 50 अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। यह आमंत्रण नव-निर्वाचित पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की पहली विदेश यात्रा (सऊदी अरब) के दौरान दिया गया।

मुख्य बिंदु

सऊदी अरब ऐसा पहला देश है जिसे चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। इसके आमंत्रण का मुख्य उद्देश्य सऊदी अरब से बड़ी मात्रा में निवेश प्राप्त करना है। पाकिस्तान ने चीन से काफी बड़ी मात्रा में ऋण लिया है, जिस कारण पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था की हालत काफी ख़राब है।

सऊदी अरब के वित्त व उर्जा मंत्री अक्टूबर, 2018 के पहले सप्ताह में पाकिस्तान की यात्रा करेंगे। इस यात्रा के दौरान चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर पर सऊदी अरब के निवेश स्थिति स्पष्ट होगी।

नोट : आर्थिक संकट के समय सऊदी अरब ने पहले भी पाकिस्तान की सहायता की है। 2014 में पाकिस्तानी रुपये के कमजोर होने के दौरान सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 1.5 अरब डॉलर का ऋण प्रदान किया था।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर

चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का हिस्सा है, इसका उद्देश्य विश्व भर में अधोसंरचना प्रोजेक्ट्स को फंडिंग प्रदान करके चीनी प्रभाव में वृद्धि करना है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर में परिवहन नेटवर्क, उर्जा परियोजनाओं, ग्वादर बन्दरगाह तथा विशेष आर्थिक क्षेत्रों का निर्माण किया जायेगा, इसका उद्देश 2030 तक पाकिस्तान को विनिर्माण हब में रूप में स्थापित करना है। पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिम में ग्वादर को चीन के शिनजियांग से रेल व उच्चमार्ग के द्वारा जोड़ा जायेगा। इस प्रोजेक्ट के लिए चीन ने पाकिस्तान को भारी मात्रा में ऋण उपलब्ध करवाया है। यह ऋण चाइना डेवलपमेंट बैंक, एक्सिम बैंक ऑफ़ चाइना तथा इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ़ चाइना द्वारा दिए गये हैं।

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