चेन्नई

तमिलनाडु रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर का उद्घाटन किया गया

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में तमिलनाडु रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर का उद्घाटन किया। इस उद्घाटन के दौरान इस रक्षा कॉरिडोर के लिए 3,038 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की गयी। विश्व की अग्रणी रक्षा उपकरण निर्माता कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने इस कॉरिडोर में निवेश करने की इच्छा जताई है।

मुख्य बिंदु

  • इस रक्षा कॉरिडोर में चेन्नई, होसुर, सालेम, कोइम्बतूर और तिरुचिरापल्ली पांच शहर शामिल है।
  • इन पांच शहरों में पहले से रक्षा निर्माण इकोसिस्टम मौजूद है, यहाँ पर ऑर्डनेन्स फैक्ट्री बोर्ड, PSU रक्षा निर्माता तथा अन्य सहयोग उद्योग मौजूद हैं।
  • इस रक्षा कॉरिडोर से देश में रक्षा उत्पादन में तीव्रता आएगी।
  • इस कॉरिडोर की सहायता से भारत को रक्षा निर्माण की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने में सहायता मिलेगी।
  • इस कॉरिडोर की विशेषता हवाई उपकरण निर्माण होगी।
  • तमिलनाडु रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर देश का दूसरा रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर है। भारत का पहला रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर पिछले वर्ष अगस्त में उत्तर प्रदेश के अलीगढ में शुरू किया गया था।

भारत के कुल निर्यातों में तमिलनाडु का स्थान पांचवा है, तमिलनाडु भारत के कुल निर्यातों का 9.8% निर्यात करता है। इस कॉरिडोर की सहायता से निर्यात के अवसरों में भी वृद्धि होगी।

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कड़कनाथ मुर्गे का GI टैग मध्य प्रदेश को मिला

कड़कनाथ मुर्गे का GI टैग चेन्नई के भौगोलिक संकेतक पंजीयन कार्यालय ने मध्य प्रदेश को दे दिया। कड़कनाथ मुर्गा मध्य प्रदेश के झाबुआ और अलीराजपुर ज़िलों में पाया जाता है। कई दिनों से इसकी प्रजाती को लेकर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच विवाद चल रहा था। दोनों ही राज्यों ने इस प्रजाति के मुर्गे के जीआई टैग को लेकर अपना-अपना दावा पेश किया था। साल 2012 में मप्र ने GI रजिस्ट्री ऑफिस चेन्नई में कड़कनाथ के लिए क्लेम किया था वहीं साल 2017 में छत्तीसगढ़ ने अपना दावा पेश किया था। मध्य प्रदेश का दावा था है कि झाबुआ ज़िले में कड़कनाथ मुर्गे की उत्पत्ति हुई है, जबकि छत्तीसगढ़ का दावा था कि कड़कनाथ को प्रदेश के दंतेवाडा ज़िले में अनोखे तरीके से पाला जाता है और यहां उसका संरक्षण और प्राकृतिक प्रजनन होता है।

“कड़कनाथ”

कड़कनाथ चिकन नस्ल अपने काले रंग के पंखों के कारण अद्वितीय है। पौष्टिकता औऱ स्वाद कड़कनाथ की सबसे खास बात है। कड़कनाथ में 25-27 फीसदी प्रोटीन होता है। आम चिकन में यह 18 से 20 फीसदी होता है। वहीं दूसरे चिकन की तुलना में इसमे फेट भी कम होता है। ये मुर्गा विटामिन-बी-1, बी-2, बी-6, बी-12, सी, ई, नियासिन, केल्शियम, फास्फोरस और हीमोग्लोबिन से भरपूर होता है।

‘जियोग्राफ़िकल इंडिकेशंस टैग’ या भौगोलिक संकेतक का मतलब ये है कि कोई भी व्यक्ति, संस्था या सरकार अधिकृत उपयोगकर्ता के अलावा इस उत्पाद के मशहूर नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकती। वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गेनाइज़ेशन के अनुसार जियोग्राफ़िकल इंडिकेशन ये बताता है कि वह उत्पाद एक ख़ास क्षेत्र से ताल्लुक़ रखता है और उसकी विशेषताएं क्या हैं। साथ ही उत्पाद का आरंभिक स्रोत भी जियोग्राफ़िकल इंडिकेशन से तय होता है।

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