जलवायु परिवर्तन

विश्व बैंक और भारत सरकार ने जलवायु रोधी वर्षा-आधारित कृषि के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए

हाल ही में विश्व बैंक, भारत सरकार और हिमाचल प्रदेश सरकार ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने और हिमाचल प्रदेश में जल प्रबंधन प्रथाओं में सुधार के लिए 80 मिलियन डालर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए।

मुख्य बिंदु

इस ऋण राशि का उपयोग लगभग 428 ग्राम पंचायतों में परियोजना को लागू करने के लिए किया जायेगा। इसका लाभ हिमाचल प्रदेश में 10 जिलों की पंचायतों को मिलेगा। इससे 400,000 से अधिक छोटे किसानों, ग्रामीण समुदायों और महिलाओं को लाभ प्राप्त होगा।  इस  परियोजना के तहत जल निगरानी स्टेशनों को स्थापित करने के लिए फण्ड प्रदान किये जायेंगे। यह भविष्य के पानी के बजट के लिए नींव रखने में मदद करेगा और भूमि के बेहतर उपयोग को भी सुनिश्चित करेगा।

हिमाचल प्रदेश की निम्न क्षेत्र में कृषि के लिए पानी की कमी है। कि गौरतलब है राज्य की वर्षा दर प्रतिवर्ष कम होती जा रही है। बर्फ क्षेत्रों में कृषि उत्पादन उच्च ऊंचाई पर स्थानांतरित हो गया है तथा तलहटियों में तापमान में वृद्धि हुई है। इससे सेब उत्पादन पर बहुत असर पड़ा है।

इस ऋण की सहायता से चारागाहों, जंगलों और घास के मैदानों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इसके यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि राज्य में स्थायी कृषि के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो।

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अन्टार्कटिका में पहली बार 20 डिग्री सेल्सियस का तापमान दर्ज किया गया

विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने हाल ही में घोषणा की कि अन्टार्कटिका में पहली बार 20.75 डिग्री सेल्सियस का तापमान दर्ज किया गया  है। यह इतिहास में अन्टार्कटिका में दर्ज किया गया सबसे अधिक तापमान है। इससे पहले जनवरी 1982 में अन्टार्कटिका में सर्वाधिक 18.3 डिग्री का तापमान दर्ज किया गया था।

मुख्य बिंदु

इस उच्च तापमान का कारण एल नीनो और समुद्री जलधाराओं का प्रभाव है। वैज्ञानिकों के अनुसार अन्टार्कटिका में विश्व के ताजे जल का 70% हिस्सा मौजूद है। यदि यह बर्फ पिघल जाती है तो वैश्विक समुद्री स्तर में 50 से 60 मीटर की वृद्धि होगी।

अन्टार्कटिका की बर्फ की चादरें

अन्टार्कटिका की बर्फ की चादरें (ice sheets) 14 मिलियन वर्ग किलोमीटर में फैली हुई हैं। अन्टार्कटिका के पूर्व में बर्फ की चादरों के नीचे भूमि है। जबकि अन्टार्कटिका पश्चिम में बर्फ के विशालकाय बर्फ के खंड समुद्र में 2500 मीटर से भी अधिक गहराई तक फैले हुए हैं।

आर्कटिक और अन्टार्कटिका की बर्फ की चादरें सूर्य से आने वाले विकिरण (radiation) के 80% से 90% का परावर्तन (reflect) कर देती हैं। जबकि अधिकतर भू-क्षेत्र सूर्य के विकिरण को अवशोषित कर लेते हैं, जिसके कारण वहां पर तापमान अधिक रहता है।

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