जलवायु परिवर्तन

17 जून : विश्व मरुस्थलीकरण व सूखा रोकथाम दिवस

प्रतिवर्ष 17 जून को विश्व मरुस्थलीकरण व सूखा रोकथाम दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार मरुस्थलीकरण से अभिप्राय शुष्क तथा अर्ध-शुष्क क्षेत्र में भूमि के निम्नीकरण से है।

मुख्य बिंदु

विश्व मरुस्थलीकरण तथा सूखा रोकथाम दिवस की घोषणा 30 जनवरी, 1995 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा प्रस्ताव A/RES/49/115 के द्वारा की गयी थी।

इस दिवस का उद्देश्य लोगों में मरुस्थलीकरण तथा सूखे के बारे में जागरूकता फैलाना है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार प्रतिवर्ष 24 अरब टन उपजाऊ भूमि शुष्क हो रही है, शुष्क क्षेत्र निम्नीकरण के कारण विकासशील देशों के राष्ट्रीय घरेलु उत्पाद में 8% की कमी आ रही है।

मरुस्थलीकरण को रोकने के लिए भारत के प्रयास

भारत सरकार द्वारा मरुस्थलीकरण को रोकने के लिए कई योजनाये चलायी जा रही हैं – पर ड्रॉप मोर क्रॉप, साइल हेल्थ कार्ड स्कीम तथा किसानों के लिए नीम कोटित यूरिया, इससे कृषि योग्य भूमि में विस्तार होगा।

पिछले पांच वर्षों में भारत के वन क्षेत्र में वृद्धि हुई है। भारत सरकार किसानों के कल्याण तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

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विश्व बैंक और भारत सरकार ने जलवायु रोधी वर्षा-आधारित कृषि के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए

हाल ही में विश्व बैंक, भारत सरकार और हिमाचल प्रदेश सरकार ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने और हिमाचल प्रदेश में जल प्रबंधन प्रथाओं में सुधार के लिए 80 मिलियन डालर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए।

मुख्य बिंदु

इस ऋण राशि का उपयोग लगभग 428 ग्राम पंचायतों में परियोजना को लागू करने के लिए किया जायेगा। इसका लाभ हिमाचल प्रदेश में 10 जिलों की पंचायतों को मिलेगा। इससे 400,000 से अधिक छोटे किसानों, ग्रामीण समुदायों और महिलाओं को लाभ प्राप्त होगा।  इस  परियोजना के तहत जल निगरानी स्टेशनों को स्थापित करने के लिए फण्ड प्रदान किये जायेंगे। यह भविष्य के पानी के बजट के लिए नींव रखने में मदद करेगा और भूमि के बेहतर उपयोग को भी सुनिश्चित करेगा।

हिमाचल प्रदेश की निम्न क्षेत्र में कृषि के लिए पानी की कमी है। कि गौरतलब है राज्य की वर्षा दर प्रतिवर्ष कम होती जा रही है। बर्फ क्षेत्रों में कृषि उत्पादन उच्च ऊंचाई पर स्थानांतरित हो गया है तथा तलहटियों में तापमान में वृद्धि हुई है। इससे सेब उत्पादन पर बहुत असर पड़ा है।

इस ऋण की सहायता से चारागाहों, जंगलों और घास के मैदानों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इसके यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि राज्य में स्थायी कृषि के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो।

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