जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक (CCPI) 2019 में भारत को 11वां रैंक प्राप्त हुआ

56 देशों की सूची में जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक (CCPI) 2019 में भारत को 11वां रैंक प्राप्त हुआ। इस सूचकांक का प्रकाशन जर्मनवाच, न्यू क्लाइमेट इंस्टिट्यूट तथा क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क द्वारा प्रकाशित किया गया।

मुख्य बिंदु

जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक में भारत के प्रदर्शन में तीन रैंक का सुधार हुआ है। हालांकि इस रिपोर्ट में कोयला परियोजनाओं के कारण भारत की स्वच्छ उर्जा की प्रगति पर प्रभाव पड़ने के लिए चिंता व्यक्त की गयी है। टॉप तीन रैंक में किसी भी देश को शामिल नहीं किया गया है क्योंकि किसी भी देश ने सभी श्रेणियों में बेहतरीन प्रदर्शन नहीं किया है। इस सूचकांक में स्वीडन को चौथा स्थान प्राप्त हुआ, जबकि मोरक्को को पांचवा स्थान प्राप्त हुआ।

जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक (CCPI) 2019 रिपोर्ट को 24वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के दौरान जारी किया गया। जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय जलवायु राजनीती में पारदर्शिता लाना है। इसके द्वारा उन देशों पर राजनीतिक तथा सामाजिक दबाव डालना है जिन्होंने जलवायु सुरक्षा के लिए अभी तक पर्याप्त कदम नहीं उठाये हैं। इस रिपोर्ट के द्वारा सर्वश्रेष्ठ जलवायु नीति वाले देशों को रेखांकित किया जाता है।

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अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस : 11 दिसम्बर

प्रतिवर्ष 11 दिसम्बर को अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस की स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2003 में प्रस्ताव पारित करके की थी। इसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को पर्वत के संरक्षण के लिए प्रेरित करना तथा पर्वतों के महत्व को रेखांकित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करना है।

मुख्य बिंदु

इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस की थीम “पर्वत आवश्यक हैं” (Mountains Matter) है। इस दिवस के लिए संयुक्त राष्ट्र खाद्य व कृषि संगठन द्वारा समन्वय किया जाता है। इस दिवस पर पर्वतों के महत्व को दर्शाने के लिए विभिन्न किस्म के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।

FAO के अनुसार पर्वत ताज़े पानी का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है, इनसे विश्व के कुल 60-80% ताज़े पानी की आपूर्ति होती है। यह जैव विविधता के लिए भी अति आवश्यक है। विश्व भर में पर्वतीय क्षेत्रों लगभग 1 अरब लोग निवास करते हैं। लगभग आधा अरब लोग जल, भोजन तथा स्वच्छ उर्जा के लिए पर्वतों पर निर्भर हैं। पिछले कुछ समय में जलवायु परिवर्तन, भू-क्षरण, अत्याधिक शोषण तथा प्राकृतिक आपदाओं के कारण पर्वतों को नुकसान हो रहा है।

 

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