जलियांवाला बाग़

पंजाब के मुख्यमंत्री ने जंग-ए-आज़ादी स्मारक के तीसरे फेज़ को जलियांवाला बाग़ हत्याकांड के पीड़ितों को समर्पित किया

73वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने जंग-ए-आज़ादी स्मारक के तीसरे फेज़ को जलियांवाला बाग़ हत्याकांड के पीड़ितों को समर्पित किया।

जंग-ए-आज़ादी स्मारक

यह एक स्मारक व संग्रहालय है, इसका निर्माण पंजाब में जालंधर के निकट करतारपुर में किया जा रहा है। इसका निर्माण देश के स्वतंत्रता आन्दोलन में बलिदान देने वाले पंजाबी समुदाय के क्रांतिकारियों की स्मृति में किया जा रहा है।

19 अक्टूबर, 2004 को पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बदल ने जंग-ए-आज़ादी स्मारक की आधारशिला रखी थी। परन्तु इस पर वास्तविक कार्य 26 मार्च, 2015 से शुरू हुआ और यह कार्य अभी भी जारी है।

इस स्मारक के द्वारा युवा पीढ़ियों को देश के गौरवशाली अतीत के बारे में जानकारी मिलेगी और युवा पीढ़ियों उन असंख्य लोगों के बारे में जान पाएंगे जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।

पंजाब सरकार के “कनेक्ट विद योर रूट्स” कार्यक्रम के द्वारा युवाओं को राज्य के समृद्ध इतिहास से परिचित करवाया जाता है, इसके लिए जंग-ए-आज़ादी स्मारक, पार्टीशन म्यूजियम, अमृत तथा विरासत-ए-खालसा तथा श्री आनंदपुर साहिब इत्यादि महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

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लोकसभा ने पारित किया जलियांवाला बाग़ राष्ट्रीय स्मारक (संशोधन) बिल, 2019

लोक सभा ने हाल ही में जलियांवाला बाग़ राष्ट्रीय स्मारक (संशोधन) बिल, 2019 पारित किया, इस बिल की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • जलियांवाला बाग़ राष्ट्रीय स्मारक अधिनियम, 1951 के तहत अमृतसर में 13 अप्रैल, 1919 को मारे गये मासूम लोगों की स्मृति में एक राष्ट्रीय स्मारक बनाने की व्यवस्था की गयी थी।
  • इस अधिनियम में राष्ट्रीय स्मारक के प्रबंधन के लिए एक ट्रस्ट की स्थापना की व्यवस्था की गयी थी।
  • 1951 के अधिनियम द्वारा इस ट्रस्ट में प्रधानमंत्री, चेयरपर्सन, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष, संस्कृति मंत्री, लोकसभा में विपक्ष का नेता, पंजाब का गवर्नर, पंजाब का मुख्यमंत्री तथा केंद्र सरकार द्वारा मनोनीत तीन प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल होते हैं ।
  • 2018 के संशोधन के द्वारा ट्रस्टी के रूप में कांग्रेस के अध्यक्ष को हटाए जाने की व्यवस्था है।
  • इस बिल में कहा गया है कि यदि लोकसभा में कोई विपक्ष का नेता न हो तो सबसे बड़े दल के नेता को ट्रस्टी चुना जायेगा।
  • 1951 के अधिनियम में पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए 3 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को ट्रस्टी के रूप में शामिल करने का निर्णय लिया गया था।
  • 2019 के संशोधन के द्वारा केंद्र सरकार को प्रतिष्ठित व्यक्ति के कार्यकाल को समाप्त करने का अधिकार दिया गया है।

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