जलियांवाला बाग़

13 अप्रैल, 2019 : जलियांवाला बाग़ हत्याकांड की 100वीं वर्षगाँठ

आज 13, अप्रैल 2019 को वीभत्स जलियांवाला बाग़ हत्याकांड की 100वीं वर्षगाँठ है। 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग़ में सैंकड़ों निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था। यह भारत के इतिहास का सबसे दुखद नरसंहार है।

पृष्ठभूमि

ब्रिटिश सरकार ने भारतीय क्रांतिकारियों का दमन करने के लिए रॉलेट एक्ट पारित किया था, इस अधिनियम के तहत बिना अपील, बिना दलील के लोगों को जेल में डाला जा सकता था।गांधीजी ने इस कानून के विरुद्ध अभियान शुरू किया। इस कानून के विरुद्ध देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों में एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया। इसकी दो राष्ट्रीय नेताओं सत्यपाल सिंह और सैफुद्दीन किचलू को गिरफ्तार किया। उनकी गिरफ्तारी के विरुद्ध लोग जलियांवाला बाग़ में एकत्रित हुए थे। ब्रिटिश अधिकार जनरल डायर के आदेश पर सैनिकों ने निर्दोष लोगों पर अंधाधुंध गोलियां चलाई। ब्रिटिश सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार इस घटना में 379 लोगों की मृत्यु हुई और हजारों लोगों घायल हुए। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मुताबिक इस घटना में लगभग 1,000 लोगों की मृत्यु हुई थी।

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जलियांवाला बाग़ राष्ट्रीय स्मारक (संशोधन) बिल, 2018

लोक सभा ने हाल ही में जलियांवाला बाग़ राष्ट्रीय स्मारक (संशोधन) बिल, 2018 लोकसभा में पारित किया, इस बिल की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • जलियांवाला बाग़ राष्ट्रीय स्मारक अधिनियम, 1951 के तहत अमृतसर में 13 अप्रैल, 1919 को मारे गये मासूम लोगों की स्मृति में एक राष्ट्रीय स्मारक बनाने की व्यवस्था की गयी थी।
  • इस अधिनियम में राष्ट्रीय स्मारक के प्रबंधन के लिए एक ट्रस्ट की स्थापना की व्यवस्था की गयी थी।
  • 1951 के अधिनियम द्वारा इस ट्रस्ट में प्रधानमंत्री, चेयरपर्सन, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष, संस्कृति मंत्री, लोकसभा में विपक्ष का नेता, पंजाब का गवर्नर, पंजाब का मुख्यमंत्री तथा केंद्र सरकार द्वारा मनोनीत तीन प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल होते हैं ।
  • 2018 के संशोधन के द्वारा ट्रस्टी के रूप में कांग्रेस के अध्यक्ष को हटाए जाने की व्यवस्था है।
  • इस बिल में कहा गया है कि यदि लोकसभा में कोई विपक्ष का नेता न हो तो सबसे बड़े दल के नेता को ट्रस्टी चुना जायेगा।
  • 1951 के अधिनियम में पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए 3 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को ट्रस्टी के रूप में शामिल करने का निर्णय लिया गया था।
  • 2018 के संशोधन के द्वारा केंद्र सरकार को प्रतिष्ठित व्यक्ति के कार्यकाल को समाप्त करने का अधिकार दिया गया है।

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