जैव इंधन

भारतीय वायुसेना के AN-32 एयरक्राफ्ट को स्वदेशी जैव-जेट इंधन के द्वारा उड़ान भरने के लिए प्रमाणीकृत किया गया

हाल ही में भारतीय वायुसेना के AN-32 एयरक्राफ्ट को स्वदेशी जैव-जेट इंधन के द्वारा उड़ान भरने के लिए प्रमाणीकृत किया गया। AN-32 एक परिवहन विमान है, इसका निर्माण रूस द्वारा किया गया था।

मुख्य बिंदु

इस जैव-जेट इंधन में 10% इंधन जैव इंधन होगा, शेष 90% पारंपरिक हवाई इंधन होगा। AN-32 में जैव-इंधन की अनुमति Centre for Military Airworthiness and Certification (CEMILAC) द्वारा दी गयी है। सर्वप्रथम जैव-जेट इंधन का उत्पादन 2013 में देहरादून में CSIR-IIP लैब में किया गया था। परन्तु परीक्षण फैसिलिटी के अभाव में इसका परीक्षण वाणिज्यिक उपयोग के लिए किया जा सका।

जुलाई, 2018 में वायुसेना के प्रमुख बी.एस. धनोआ ने स्वदेशी इंधन के परीक्षण तथा प्रमाणीकरण की घोषणा की थी। इसके बाद भारतीय वायुसेना के इंजीनियर तथा फ्लाइट टेस्ट क्रू ने विभिन्न टेस्ट किये।

पिछले एक वर्ष में भारतीय वायुसेना ने हरित हवाई इंधन के कई परीक्षण किये। इन परीक्षणों का उद्देश्य इंधन के अंतर्राष्ट्रीय मानक सुनिश्चित करना था।

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भारत की पहली जैव इंधन युक्त उड़ान में किया गया था रतनजोत बीज का इस्तेमाल

जैव इंधन द्वारा चालित भारत की पहली उड़ान में रतनजोत बीज तेल का उपयोग किया गया था, यह उड़ान देहरादून से दिल्ली तक भरी गयी थी। इस इंधन में रतनजोत बीज के तेल को हवाई टरबाइन इंधन से मिलाया गया था। 43 मिनट की यह उड़ान स्पाइसजेट के बोम्बार्डीयर Q-400 विमान द्वारा भरी गयी थी। इस उड़ान के दौरान विमान में 20 अधिकारी तथा 5 क्रू मेम्बर्स सवार थे।

मुख्य बिंदु

इस उड़ान के दौरान विमान के एक इंजन में 25% जैव इंधन (रतनजोत बीज से प्राप्त) तथा 75% हवाई टरबाइन इंधन का मिश्रण था, जबकि विमान के दुसरे इंजन में केवल हवाई टरबाइन इंधन ही था। इस टेस्ट फ्लाइट का उद्देश्य वायुयान में जैव इंधन के उपयोग की तकनीकी सम्भावना को सुनिश्चित था। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अनुसार हवाई टरबाइन इंधन के साथ 50% तक जैव इंधन का मिश्रण किया जा सकते हैं। इस मिश्रण से लागत में 15-20% की कमी आ सकती है।

रतनजोत

रतनजोत एक शुष्क रोधी पौधा है जो कम उपजाऊ भूमि में उगता है। इसका विकास काफी तीव्र गति से होता है और यह 50 वर्ष तक बीज उत्पन्न करता है। यह देश के कई भागों में पाया जाता है। यह पौधा बहुत कम पोषक तत्वों की सहायता से भी जीवित रह सकता है।

रतनजोत के बीज में 37% तेल होता है। यह बिना धुंए की ज्वाला उत्पन्न करता है। यह वातावरण को अधिक नुकसान नहीं पहुंचाता। इसका उपयोग आरम्भ में डीजल इंजन में इंधन के रूप में किया गया था। रतनजोत का उपयोग कीटनाशक के रूप में भी किया जाता है। इसके अतिरिक्त रतनजोत का उपयोग औषधि के रूप में भी किया जाता है।

रतनजोत से प्राप्त जैव इंधन

इसका उत्पादन वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसन्धान परिषद् ने देहरादून में स्थित प्रयोगशाला में भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के साथ मिलकर किया गया था। जैव इंधन के रूप में उपयोग के लिए रतनजोत बीज पर वर्ष 2000 में प्रयोग शुरू हुए थे, व्यावहारिक तौर पर जैव इंधन का निर्माण करने के लिए लगभग 8 वर्ष का समय लगा।

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