जैव-विविधता

भारत सरकार ने जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में 5 पहलें लांच की

22 मई, 2020 को अंतर्राष्ट्रीय जैविक विविधता दिवस मनाने के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जैव विविधता के संरक्षण पर पांच पहलें शुरू की।

मुख्य बिंदु

यह पाँच पहलें निम्नलिखित शामिल हैं  :

  • “जैव विविधता संरक्षण इंटर्नशिप कार्यक्रम” को लांच किया गया। इसका उद्देश्य 1 वर्ष की अवधि के लिए स्नातकोत्तर कार्यक्रम में 20 छात्रों को शामिल करना है। यह कार्यक्रम रचनात्मक छात्रों को संलग्न करेगा जो जैव विविधता संरक्षण और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के बारे में जानने के इच्छुक हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने लुप्तप्राय प्रजातियों का अवैध तस्करी के लिए अभियान लांच किया है।
  • वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो का अभियान ‘नॉट ऑल एनिमल्स माइग्रेट’ लांच किया गया।
  • एक वेबिनार श्रृंखला शुरू की गई थी। यह श्रृंखला “जैव विविधता संरक्षण और जैविक विविधता अधिनियम, 2002” पर थी।
  • पार्टियों का विश्व वन्यजीव कोष मॉडल सम्मेलन लांच किया गया था। इसमें युवा पीढ़ी शामिल है।

अंतर्राष्ट्रीय जैविक विविधता दिवस

प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय जैविक विविधता दिवस मनाया जाता है। इस बार इस दिन को “हमारे समाधान प्रकृति में हैं” थीम के तहत मनाया गया है।

जैव विविधता के लिए सुपर ईयर

संयुक्त राष्ट्र ने 2010 और 2020 के बीच क्रियान्वित की जाने वाली  20 वैश्विक कार्रवाइयों को तैयार किया है। इसे ‘जैव विविधता के लिए रणनीतिक योजना’ कहा जाता है। वर्ष 2020 को जैव विविधता के लिए सुपर ईयर कहा जाता है।

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22 मई: अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस

जैव विविधता के मुद्दों पर समझ और जागरूकता बढ़ाने हेतु हर साल 22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 2000 में संकल्प 55/201 के माध्यम से इस दिवस को मानाने की घोषणा की गई ।

जैव विविधता संरक्षण के लिए प्रयास

संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 2010 को अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता वर्ष के रूप में मनाया गया था। जैव विविधता संरक्षण के लिए प्रयास तेज हो गए है। देश में जैव विविधता संरक्षण की दिशा में सार्थक कदम उठाए जा रहे हैं। देश में 61 विभिन्न लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के लिए भारतीय प्राणी उद्यानों में संभावित संरक्षित प्रजनन पहचान कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई जा रही है। जिसके अंतर्गत गिद्धों, पेंटिड रूफ कछुए, ब्लिथंस टैगोपन, हसूम्स फीजेंट तथा पंगोलिन जीवों के लिए संरक्षित प्रजनन केंद्रों की आरंभिक चरण में स्थापना की गई है। कुछ विशेष जीवों के लिए इसके अलावा व्यापक रूप से कार्ययोजना चल रही है जैसे कि सन् 1973 से बाघ परियोजना आरंभ की गई है जो कि बाघों के संरक्षण से संबंधित है और अब इसके उत्साहवर्धक परिणाम मिलने लगे हैं।

जैविक विविधता (या जैव विविधता) शब्द को पहली बार 1968 में वन्यजीव वैज्ञानिक और संरक्षणवादी रेमंड एफ दस्मान द्वारा प्रयोग में लाया गया था। यह शब्द 1980 के दशक के दौरान व्यापक रूप से उपयोग में आया। जैव विविधता एक क्षेत्र के कुल जीन, प्रजातियों और पारिस्थितिक तंत्र को संदर्भित करती है।

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