ट्राइबल कोआपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया

नई दिल्ली में किया जा रहा है “आदि महोत्सव” का आयोजन

राष्ट्रीय जनजातीय उत्सव-आदि महोत्सव का आयोजन 16 नवम्बर से 30 नवम्बर, 2019 के बीच किया जा रहा है। इसका उद्घाटन केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया। इस उत्सव में जनजातीय संस्कृति, शिल्पकला, भोजन इत्यादि को प्रदर्शित किया जाएगा।

आदि महोत्सव

“आदि महोत्सव” का आयोजन केन्द्रीय जनजातीय मामले मंत्रालय तथा ट्राइबल कोआपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (TRIFED) द्वारा किया जा रहा है। TRIFED ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में इस प्रकार के 26 उत्सव आयोजित करने का लक्ष्य रखा है। अभी तक लेह-लद्दाख, नॉएडा, शिमला, ऊटी, इंदौर, पुणे, भुबनेश्वर तथा विशाखापत्तनम में इस तरह के उत्सव आयोजित किये जा चुके हैं, जिनमे 900 से अधिक शिल्पकार हिस्सा ले चुके हैं, इन इवेंट्स से अब तक 5 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री की जा चुकी है।

इस उत्सव में जनजातीय संस्कृति, भोजन, शिल्प तथा औषधियों का प्रदर्शन किया जायेगा, इससे जनजातीय समुदायों के लिए आर्थिक विकास में वृद्धि होगी। इस उत्सव में देश-भर के 27 से राज्यों से 1000  से अधिक जनजातीय शिल्पकार हिस्सा ले रहे हैं।

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वन धन इंटर्नशिप कार्यक्रम के द्वारा जनजातीय लोगों की सहायता की जायेगी

केन्द्रीय जनजातीय मंत्रालय ने 17 अक्टूबर, 2019 को वन धन इंटर्नशिप कार्यक्रम लांच किया है। वन धन इंटर्नशिप कार्यक्रम से जनजातीय लोगों को लाभ होगा। इसका आयोजन ट्राइबल कोआपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (TRIFED) द्वारा किया जायेगा।

कार्यक्रम की विशेषताएं

  • इस कार्यक्रम में  सामाजिक कार्य, समाज सेवा/ग्रामीण प्रबंधन इत्यादि से सम्बंधित प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों के 18 इंटर्न हिस्सा लेंगे।
  • यह इंटर्न इस कार्यक्रम के अग्रणी फील्ड वर्कर होंगे।
  • उनका झुकाव जनजातीय आजीविका से सम्बंधित मामलों पर होगा।
  • यह इंटर्नशिप की अवधि 6 महीने की होगी।
  • इन इंटर्न्स को एक सप्ताह का प्रशिक्षण भी दिया जायेगा।

वन धन योजना

14 अप्रैल, 2018 को प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीजापुर, छत्तीसगढ़ में अम्बेडकर जयंती के महोत्सव के दौरान इस योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का उद्देश्य गैर-लकड़ी के छोटे वन उत्पादन (MFP), वन की वास्तविक संपत्ति का उपयोग करके जनजातियों के लिए आजीविका उत्पादन करना है। इसके लिए, योजना उन्हें वन उत्पादन के मूल्यवर्धन के लिए कौशल उन्नयन और क्षमता निर्माण प्रशिक्षण भी प्रदान करेगी। इसका उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान और कौशल को प्रौद्योगिकी और आईटी की मदद से और निखारना है। इसका मुख्य उद्देश्य जनजातीय जमाकर्ताओं और कारीगरों की एमएफपी-केंद्रित आजीविका के विकास को बढ़ावा देना है।

कार्यान्वयन: इसे प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान करके केंद्रीय स्तर पर जनजातीय मामलों के मंत्रालय के माध्यम से तथा राष्ट्रीय स्तर पर नोडल एजेंसी के रूप में भारत के जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (TRIFED) द्वारा लागू किया जाएगा। राज्य स्तर पर, एमएफपी के लिए राज्य नोडल एजेंसी और जिला कलेक्टर योजना कार्यान्वयन में जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

वन धन विकास केंद्र: वन संपदा से समृद्ध जनजातीय जिलों में वन धन विकास केंद्र जनजातीय समुदाय के माध्यम से संचालित किए जाएंगे। प्रत्येक केंद्र 10 जनजातीय स्वयं सहायता समूह का गठन करेगा तथा प्रत्येक समूह में 30 जनजातीय संग्रहकर्ता शामिल होंगे. जो कौशल उन्नयन और क्षमता निर्माण प्रशिक्षण प्रदान करेंगे और प्राथमिक प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन सुविधा की स्थापना करेंगे। स्थानीय रूप से इन केंद्रों का प्रबंधन प्रबंध समिति द्वारा किया जाएगा।

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