डब्ल्यूएचओ

श्रीलंका और मालदीव डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में रुबेला और मीज़ल्स दोनों को खत्म करने वाले पहले दो देश बन गए

जिनेवा बेस्ड विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के 8 जुलाई, 2020 को घोषणा की है कि श्रीलंका और मालदीव रूबेला वायरस को समाप्त कर दिया है। इसके साथ, श्रीलंका और मालदीव डब्ल्यूएचओ के दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र से पहले दो देश बन गए जिन्होंने मीज़ल्स और रूबेला वायरस दोनों को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया है।

खसरा वायरस को क्षेत्र से 5 देशों द्वारा समाप्त किया गया

2017-18 में, भूटान, तिमोर-लेस्ते, उत्तर कोरिया और मालदीव दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र डब्ल्यूएचओ के चार देश थे जो मीज़ल्स वायरस को सफलतापूर्वक समाप्त चुके थे। जुलाई 2019 में, खसरा को खत्म करने के लिए श्रीलंका डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र से तीसरा राष्ट्र बन गया।

डब्ल्यूएचओ द्वारा दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र से खसरा को खत्म करने के लिए निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2023 था।

रूबेला वायरस को क्षेत्र के 2 देशों द्वारा समाप्त किया गया

डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र से रूबेला को समाप्त करने वाले श्रीलंका और मालदीव पहले दो देश हैं। डब्ल्यूएचओ द्वारा दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र से रूबेला वायरस को खत्म करने के लिए निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2023 है।

डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र

WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में कुल 11 देश हैं। वे भारत, श्रीलंका, भूटान, बांग्लादेश, थाईलैंड, मालदीव, म्यांमार, उत्तर कोरिया, तिमोर-लेस्ते, इंडोनेशिया और नेपाल हैं।

आप इन अपडेट्स को करेंट अफेयर्स टूड़े मोबाइल एप्प में भी पढ़ सकते हैं।

Categories:

Month:

Tags: , , , ,

COVID-19 के एयरबोर्न और एरोसोल ट्रांसमिशन की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता: WHO

दुनिया भर में सरकारें डब्ल्यूएचओ की सिफारिशों और दिशानिर्देशों पर निर्भर हैं ताकि संक्रामक वायरस के प्रसार को रोका जा सके। Clinical Infectious Diseases Journal में वैज्ञानिकों के एक समूह द्वारा एक खुला पत्र प्रकाशित किया गया था, इसमें COVID -19 संक्रमण के खिलाफ डब्ल्यूएचओ  द्वारा जारी दिशा निर्देशों और अनुशंसाओं में संशोधन करने के लिए कहा गया है।

मुख्य बिंदु

वैज्ञानिकों के समूह ने दावा किया कि हाल के अध्ययनों में पाया गया है कि COVID -19 संक्रमण छोटे हवाई कणों के माध्यम से फैल सकता है।

WHO की सिफारिशों और दिशानिर्देशों के अनुसार, COVID -19 संक्रमण एक संक्रमित व्यक्ति के मुंह और नाक के माध्यम से निष्कासित छोटी बूंदों के रूप में फैल रहा है।

7 जुलाई, 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन  की संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण की तकनीकी प्रमुख  मारिया वान करखोव  ने वैज्ञानिकों के समूह द्वारा किये गये दावे को  स्वीकार किया और कहा कि एयरबोर्न की संभावना या वायरस का एयरोसोल प्रसारण हो सकता है, डब्ल्यूएचओ ने भी इस तरह के साक्ष्य पाए हैं।  लेकिन जो सबूत पाए गए हैं, वे निश्चित नहीं हैं क्योंकि इस तरह के प्रसारण कुछ विशिष्ट परिस्थितियों जैसे खराब हवादार प्रणालियों में हो सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि डब्ल्यूएचओ आगामी दिनों में इसी विषय पर एक वैज्ञानिक ब्रीफिंग प्रकाशित करेगा।

डब्ल्यूएचओ को लिखा गया खुला पत्र दुनिया भर के 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों के एक समूह द्वारा लिखा गया है।

आप इन अपडेट्स को करेंट अफेयर्स टूड़े मोबाइल एप्प में भी पढ़ सकते हैं।

Categories:

Month:

Tags: , , , ,

Advertisement