डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो में इबोला प्रकोप को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो में इबोला प्रकोप को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो में एबोला के कारण 1600 से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है। इससे नार्थ किवू तथा इतुरी नामक दो प्रांत सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। यह इतिहास में इस प्रकार की पांचवी घोषणा है। इबोला वायरस के कारण अचानक बुखार, अत्याधिक कमजोरी, मांसपेशी में दर्द तथा गले में तकलीफ होती है। इसके पश्चात् व्यक्ति को उल्टी, डायरिया तथा बाद में व्यक्ति के शरीर से खून निकलने लगता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन

विश्व स्वास्थ्य संगठन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी सहयोग एवं मानक विकसित करने वाली संस्था है। यह संयुक्त राष्ट्र संघ की एक अनुषांगिक इकाई है। इसकी स्थापना 7 अप्रैल 1948 को की गयी थी। इसके 193 सदस्य देश तथा दो संबद्ध सदस्य हैं। इसका उद्देश्य विश्व के लोगो के स्वास्थ्य का स्तर ऊँचा करना है। स्विटजरलैंड के जेनेवा शहर में इसका मुख्यालय स्थित है। भारत भी इसका सदस्य देश है भारत की राजधानी दिल्ली में इसका भारतीय मुख्यालय स्थित है।

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो एक अफ्रीकी देश है, पहले इस देश को जायरे नाम से भी जाना जाता था। क्षेत्रफल के आधार पर अफ्रीका का दूसरा सबसे बड़ा देश है। इसकी राजधानी किंशासा में स्थित है। DR कांगो ने 30 जून, 1960 को बेल्जियम से स्वतंत्रता प्राप्त की थी। इसका कुल क्षेत्रफल 23,45,409 वर्ग किलोमीटर है।

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डेनिस मुक्वेग तथा नादिया मुराद ने जीता नोबेल शांति पुरस्कार 2018

डेनिस मुक्वेग तथा नादिया मुराद को  नोबेल शांति पुरस्कार 2018 का विजेता घोषित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार युद्ध और सशस्त्र संघर्ष में हथियार के रूप में यौन हिंसा के उपयोग को समाप्त करने के प्रयास के लिए दिया जा रहा है। इसकी घोषणा नार्वेजियन नोबेल समिति ने की।

डेनिस मुक्वेग

डेनिस मुक्वेग का जन्म 1 मार्च, 1955 को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो के बुकावू में हुआ था। वे पेशे के एक गायनेकोलाजिस्ट हैं, उन्होंने 1999 बुकावू में  पंजी हॉस्पिटल की स्थापना की थी। वे यौन हिंसा से पीड़ित महिलाओं का उपचार करने में विशेषज्ञता रखते हैं। वे द्वितीय कांगो युद्ध के बाद यौन हिंसा की शिकार हजारों महिलाओं का उपचार कर चुके हैं।

नादिया मुराद

नादिया मुराद का जन्म इराक के कोजो में 1993 में हुआ था, वे एक यज़ीदी कुरदीश मानवाधिकार कार्यकर्ता है। उनका आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट द्वारा अपहरण किया गया था, वे तीन महीने तक इस्लामिक स्टेट की कैद में रहीं। नादिया मुराद “नादिया इनिशिएटिव” की संस्थापक हैं, यह संगठन नरसंहार तथा मानव तस्करी इत्यादि से पीड़ित  बच्चों व महिलाओं की सहायता करता है।

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