तेजस लड़ाकू विमान

रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 83 तेजस लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी

18 मार्च, 2020 को रक्षा अधिग्रहण परिषद ने भारतीय वायु सेना के लिए स्वदेश निर्मित 83 तेजस लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी। इस प्रस्ताव को सुरक्षा पर कैबिनेट समिति के तहत रखा जायेगा। यह मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।

तेजस

लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट LCA-तेजस को एयरक्राफ्ट डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा डिजाइन किया गया था। एयरक्राफ्ट डेवलपमेंट एजेंसी डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान विकास संगठन) के तहत कार्य करती है। इसका निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा किया गया है।

यह विमान भारतीय वायु सेना के लिए अति महत्वपूर्ण हैं। गौरतलब है कि 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान भारत को पर्याप्त लड़ाकू विमानों  की कमी के कारण काफी नुकसान हुआ था।

रक्षा अधिग्रहण परिषद

रक्षा अधिग्रहण परिषद, रक्षा मंत्रालय के तहत कार्य करती है और निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था है। इन निर्णयों में तीनों सेवाओं के लिए नीतियां, अधिग्रहण और पूंजी शामिल हैं। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह इस परिषद के अध्यक्ष हैं। 1999 में कारगिल युद्ध के बाद 2001 में इस परिषद् का गठन किया गया था।

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राजनाथ सिंह बने LCA तेजस में उड़ान भरने वाले पहले रक्षामंत्री

केन्द्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह हल्के लड़ाकू विमान ‘तेजस’ में उड़ान भरने वाले पहले रक्षामंत्री बन गये हैं। उन्होंने एयर वाईस मार्शल नर्मदेश्वर तिवार के साथ बंगलुरु में LCA तेजस में 30 मिनट तक उड़ान भरी।

तेजस

तेजस हल्के भार वाला सिंगल सीटर लड़ाकू विमान है, इसमें एक ही इंजन उपयोग किया गया है। यह अपनी श्रेणी का विश्व का सबसे छोड़ा व सबसे हल्का सुपरसोनिक लड़ाकू विमान है। इसका शुरूआती निर्माण 1980 के दशक में शुरू किया था, इसका निर्माण मिग 21 लड़ाकू विमान की जगह लेने के लिए किया गया है। इसका नाम ‘तेजस’ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा रखा गया था। इस एयरक्राफ्ट को पूर्ण रूप से विकसित करने में लगभग 20 वर्षों का समय लगा।

तेजस की विशेषताएं

तेजस में quadruplex digital fly-by-wire उड़ान नियंत्रण प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिससे तेजस को नियंत्रित करना आसान होता है। इसमें डिजिटल कंप्यूटर बेस्ड अटैक सिस्टम और ऑटोपायलट मोड भी हैं।

इसके छोटे आकार और कार्बन कम्पोजिट के उपयोग के कारण राडार द्वारा इसे पकड़ा जाना मुश्किल है। इसमें आधुनिक एवियोनिक सॉफ्टवेर का उपयोग किया गया, जिसे आवश्यकता पड़ने पर आसानी से अपडेट किया जा सकता है।

इसकी रेंज लगभग 400 किलोमीटर है, इसका उपयोग एयर-टू-ग्राउंड ऑपरेशन में किया जायेगा। राफेल और सुखोई लम्बी दूरी तय करके दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर सकते हैं।

तेजस से हवा-से-हवा में मार कर सकने वाली मिसाइलें दागी जा सकती है। इसमें बम तथा अन्य प्रिसिशन गाइडेड विस्फोटक भी ले जाए जा सकते हैं। DRDO ने तेजस के परीक्षण दौरान इसमें कई प्रकार की मिसाइल इत्यादि का उपयोग किया। यह लेज़र गाइडेड बम गिराने में भी सक्षम है।

तेजस ने तमिलनाडु के सुलुर एयर फ़ोर्स स्टेशन में जुलाई, 2018 से कार्य शुरू किया गया, इसे दो वर्ष पूर्व भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। यह भारतीय वायुसेना के 45 स्क्वाड्रन के ‘फ्लाइंग डैगर्स’ का हिस्सा है।

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