तेजस

बीटिंग द रीट्रीट समारोह के साथ गणतंत्र दिवस कार्यक्रम संपन्न हुआ

29 जनवरी, 2020 को दिल्ली में बीटिंग द रीट्रीट कार्यक्रम हुआ, इस कार्यक्रम के साथ ही गणतंत्र दिवस कार्यक्रम का आधिकारिक समापन हुआ। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई अन्य गणमान्य अतिथि शरीक हुए। बीटिंग द रीट्रीट समारोह का आयोजन नईं दिल्ली के ऐतिहासिक विजय चौक पर किया जाता है।

पृष्ठभूमि

सदियों पहले युद्धकाल में संध्या हो जाने पर बिगुल बजने के बाद सेनाएं अपने-अपने शिविरों में वापस चली जाती थीं। बीटिंग द रीट्रीट इसी परंपरा का हिस्सा है। भारत के गणतंत्र दिवस समारोह का समापन बीटिंग द रीट्रीट कार्यक्रम के बाद होता है।

बीटिंग द रीट्रीट के अवसर पर थल सेना, नौसेना तथा वायुसेना के बैंड प्रस्तुतियां देते हैं। इस वर्ष 27 परफॉरमेंस में से 19 धुनें भारतीय संगीतकारों द्वारा तैयार की गयी थीं। इस वर्ष की भारतीय धुनें थीं : इंडियन सोल्जर, नमस्ते इंडिया, मुश्कोह वैली, तेजस, द ग्रेट मार्शल, सारे जहाँ से अच्छा।

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भारतीय वायुसेना करेगी 200 लड़ाकू विमानों का अधिग्रहण

भारतीय वायुसेना 200 लड़ाकू विमानों का अधिग्रहण करेगी।  इन 200 लड़ाकू विमानों में से 83 तेजस मार्क 1A लड़ाकू विमान हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड से लिए जायेंगे। शुरू में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड 8 तेजस मार्क 1A लड़ाकू विमानों का निर्माण प्रतिवर्ष करेगा, बाद में प्रतिवर्ष 16 विमानों का उत्पादन किया जाएगा।

तेजस

तेजस हल्के भार वाला सिंगल सीटर लड़ाकू विमान है, इसमें एक ही इंजन उपयोग किया गया है। यह अपनी श्रेणी का विश्व का सबसे छोड़ा व सबसे हल्का सुपरसोनिक लड़ाकू विमान है। इसका शुरूआती निर्माण 1980 के दशक में शुरू किया था, इसका निर्माण मिग 21 लड़ाकू विमान की जगह लेने के लिए किया गया है। इसका नाम ‘तेजस’ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा रखा गया था। इस एयरक्राफ्ट को पूर्ण रूप से विकसित करने में लगभग 20 वर्षों का समय लगा।

तेजस की विशेषताएं

तेजस में quadruplex digital fly-by-wire उड़ान नियंत्रण प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिससे तेजस को नियंत्रित करना आसान होता है। इसमें डिजिटल कंप्यूटर बेस्ड अटैक सिस्टम और ऑटोपायलट मोड भी हैं।

इसके छोटे आकार और कार्बन कम्पोजिट के उपयोग के कारण राडार द्वारा इसे पकड़ा जाना मुश्किल है। इसमें आधुनिक एवियोनिक सॉफ्टवेर का उपयोग किया गया, जिसे आवश्यकता पड़ने पर आसानी से अपडेट किया जा सकता है।

इसकी रेंज लगभग 400 किलोमीटर है, इसका उपयोग एयर-टू-ग्राउंड ऑपरेशन में किया जायेगा। राफेल और सुखोई लम्बी दूरी तय करके दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर सकते हैं।

तेजस से हवा-से-हवा में मार कर सकने वाली मिसाइलें दागी जा सकती है। इसमें बम तथा अन्य प्रिसिशन गाइडेड विस्फोटक भी ले जाए जा सकते हैं। DRDO ने तेजस के परीक्षण दौरान इसमें कई प्रकार की मिसाइल इत्यादि का उपयोग किया। यह लेज़र गाइडेड बम गिराने में भी सक्षम है।

तेजस ने तमिलनाडु के सुलुर एयर फ़ोर्स स्टेशन में जुलाई, 2018 से कार्य शुरू किया गया, इसे दो वर्ष पूर्व भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। यह भारतीय वायुसेना के 45 स्क्वाड्रन के ‘फ्लाइंग डैगर्स’ का हिस्सा है।

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