तेजस

लंगकावी इंटरनेशनल मेरीटाइम एरो एक्सपो 2019

लंगकावी इंटरनेशनल मेरीटाइम एरो एक्सपो 2019 (LIMA-19) की शुरुआत हाल ही में मलेशिया में हुई। भारतीय वायुसेना इस मेरीटाइम एरो एक्सपो में पहली बार हिस्सा ले रही है। यह LIMA का 15वां संस्करण है। इसका उद्घाटन मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर बिन मोहम्मद ने की।

लंगकावी इंटरनेशनल मेरीटाइम एरो एक्सपो

लंगकावी इंटरनेशनल मेरीटाइम एरो एक्सपो उद्योग जगत के स्टेकहोल्डर्स को प्लेटफार्म प्रदान करता है जहाँ पर नयी साझेदारी तथा व्यापारिक समझौते पर चर्चा की जाती है। पहली बार इस एक्सपो का आयोजन 1991 में किया गया था। यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में इस प्रकार का सबसे बड़ा एक्सपो है।

लंगकावी इंटरनेशनल मेरीटाइम एरो एक्सपो 2019 में भारत की उपस्थिति

इस प्रदर्शनी में भारत वायुसेना स्वदेशी रूप से निर्मित लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस को प्रदर्शित करेगी। तेजस का निर्माण हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा किया गया है। भारतीय वायुसेना तथा भारतीय नौसेना के लिए इसका डिजाईन एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी द्वारा तैयार किया गया था। इसके अलावा भारतीय वायुसेना तथा रॉयल मलेशियन एयर फ़ोर्स के बीच विचार-विमर्श भी किया जाएगा। इस प्रदर्शनी में भारत की आईएनएस कदमत्त स्टेल्थ एंटी-सबमरीन कार्वेट भी हिस्सा ले रही है।

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LCA तेजस को मिली फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस

भारतीय वायुसेना को रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) से लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के मानक प्रमाणीकरण के लिए फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस मिल गयी है। DRDO के फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस से प्रमाणित किया गया है कि तेजस युद्ध में हिस्सा लेने के काबिल है।

तेजस

तेजस हल्के भार वाला सिंगल सीट लड़ाकू विमान है, इसमें एक ही इंजन उपयोग किया गया है। यह अपनी श्रेणी का विश्व का सबसे छोड़ा व सबसे हल्का सुपरसोनिक लड़ाकू विमान है। इसका शुरूआती निर्माण 1980 के दशक में शुरू किया था, इसका निर्माण मिग 21 लड़ाकू विमान की जगह लेने के लिए किया गया है। इसका नाम ‘तेजस’ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा रखा गया था। इस एयरक्राफ्ट को पूर्ण रूप से विकसित करने में लगभग 20 वर्षों का समय लगा।

तेजस की विशेषताएं

तेजस में quadruplex digital fly-by-wire उड़ान नियंत्रण प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिससे तेजस को नियंत्रित करना आसान होता है। इसमें डिजिटल कंप्यूटर बेस्ड अटैक सिस्टम और ऑटोपायलट मोड भी हैं।

इसके छोटे आकार और कार्बन कम्पोजिट के उपयोग के कारण राडार द्वारा इसे पकड़ा जाना मुश्किल है। इसमें आधुनिक एवियोनिक सॉफ्टवेर का उपयोग किया गया, जिसे आवश्यकता पड़ने पर आसानी से अपडेट किया जा सकता है।

इसकी रेंज लगभग 400 किलोमीटर है, इसका उपयोग एयर-टू-ग्राउंड ऑपरेशन में किया जायेगा। राफेल और सुखोई लम्बी दूरी तय करके दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर सकते हैं।

तेजस से हवा-से-हवा में मार कर सकने वाली मिसाइलें दागी जा सकती है। इसमें बम तथा अन्य प्रिसिशन गाइडेड विस्फोटक भी ले जाए जा सकते हैं। DRDO ने तेजस के परीक्षण दौरान इसमें कई प्रकार की मिसाइल इत्यादि का उपयोग किया। यह लेज़र गाइडेड बम गिराने में भी सक्षम है।

तेजस ने तमिलनाडु के सुलुर एयर फ़ोर्स स्टेशन में जुलाई, 2018 से कार्य शुरू किया गया, इसे दो वर्ष पूर्व भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। यह भारतीय वायुसेना के 45 स्क्वाड्रन के ‘फ्लाइंग डैगर्स’ का हिस्सा है।

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