त्रिपुरा

त्रिपुरा में किया जाएगा हार्नबिल उत्सव का आयोजन

त्रिपुरा सरकार ने पहली बार 8 फरवरी, 2020 को दो दिवसीय हार्नबिल उत्सव के आयोजन करने का निर्णय लिया है। हालाँकि हार्नबिल उत्सव नागालैंड का महत्वपूर्ण उत्सव है, इसका आयोजन नागालैंड में दिसम्बर माह में किया जाता है। त्रिपुरा द्वारा हार्नबिल का आयोजन हार्नबिल नामक पक्षी के संरक्षण तथा पर्यटन के द्वारा आजीविका को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर ने भी हार्नबिल उत्सव मनाना शुरू कर दिया है।

हार्नबिल फेस्टिवल

हार्नबिल फेस्टिवल का आयोजन नागालैंड में प्रतिवर्ष 1 से 10 दिसम्बर के बीच में किया जाता है। यह एक सांस्कृतिक उत्सव है। इस उत्सव का नाम इंडियन हार्नबिल नामक पक्षी पर रखा गया है। इस उत्सव के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, खेल प्रतिस्पर्धा तथा भोजन मेले इत्यादि आयोजित किये जाते हैं। इसके अलावा चित्रकला, लकड़ी की नक्काशी तथा मूर्तिकला की प्रदर्शनी भी की जाती है।

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21 जनवरी : त्रिपुरा, मणिपुर और मेघालय का राज्यत्व दिवस

21 जनवरी को त्रिपुरा, मणिपुर और मेघालय का 47वां राज्यत्व दिवस मनाया जा रहा है। त्रिपुरा, मणिपुर और मेघालय को 21 जनवरी, 1972 को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था।

उत्तर पूर्वी राज्यों का पुनर्गठन

स्वतंत्रता के समय भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र को निम्नलिखित तीन भागों में विभाजित किया गया था :

  • ब्रिटिश भारत का असम प्रांत
  • मणिपुर और त्रिपुरा के देशी रियासतें
  • उत्तर-पूर्व सीमान्त प्रांत (NEFA)

मणिपुर और त्रिपुरा को 1949 में केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया था। नागालैंड को 1 दिसम्बर, 1963 को राज्य का दर्जा दिया गया था। मेघालय को असम के भीतर ही असम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 के द्वारा स्वायत्त राज्य बनाया गया था। 1972 में मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा को उत्तर पूर्व पुनर्गठन अधिनियम, 1972 के द्वारा पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया था। असम की मिज़ो पहाड़ियों तथा NEFA को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। 1986 में मिज़ो समझौते के परिणामस्वरूप 1987 में मिजोरम भारत का पूर्ण राज्य बना।

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