देवेन्द्र फडनवीस

संगीतकार खय्याम ने जीता हृदयनाथ लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड

संगीतकार, लेखक तथा राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता संगीत निर्देशक मोहम्मद ज़हूर खय्याम हाशमी ने 2018 हृदयनाथ लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड जीता। उन्हें यह पुरस्कार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस द्वारा मुंबई में प्रदान किया जायेगा। इस वर्ष यह पुरस्कार हृदयनाथ मंगेशकर के 81वें जन्मदिन पर आयोजित किया जायेगा।

खय्याम

खय्याम ने अपना करियर 1943 में 17 वर्ष की आयु में लुधियाना से शुरू किया था। बाद में उन्होंने संगीत निर्देशकों “शर्माजी-वर्माजी” के मिलकर “हीर रांझा” (1948) फिल्म के लिए काम किया। उन्होंने “फुटपाथ” (1953), “बीवी” तथा “फिर सुबह होगी” (1958) जैसी फिल्मों में भी कार्य किया। 1961 में आई “शोला और शबनम” फिल्म से संगीत निर्देशक के रूप में उनको काफी दृढ़ता मिली। इसके बाद उन्होंने “मोहब्बत इसको कहते हैं” (1965), “आखरी ख़त” (1966), “कभी कभी” (1976), “त्रिशूल” (1978), “नूरी” (1979), “थोड़ी सी बेवफाई” (1980), “दर्द” तथा “अहिस्ता” (1981), “दिल आखिर दिल है” तथा “बाज़ार” (1982) तथा “रज़िया सुल्तान” (1983) जैसी फिल्मों के लिए संगीत दिया। 1981 में उन्होंने उमराव जान फिल्म के लिए काफी संगीत दिया, यह फिल्म उनकी सबसे सफल फिल्मों में से रही, इस फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार तथा फिल्मफेयर अवार्ड भी प्रदान किया गया।

हृदयनाथ मंगेशकर अवार्ड

इस पुरस्कार की स्थापना 2011 में मुंबई की एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन हृदयनाथ आर्ट ने संगीतकार तथा गायक हृदयनाथ मंगेशकर के सम्मान में की थी। इस अवार्ड के द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में सफल लोगों को सम्मानित किया जाता है। इससे पहले लता मंगेशकर, आशा भोसले, अमिताभ बच्चन, हरिप्रसाद चौरसिया, ए. आर. रहमान को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। हृदयनाथ प्रसिद्ध संगीतकार दीनानाथ मंगेशकर के पुत्र तथा लता मंगेशकर व आशा भोसले के भाई हैं।

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महाराष्ट्र सरकार ने की पिछड़े हुए विदर्भ और उत्तरी मराठवाडा के लिए 21,222 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की घोषणा

महाराष्ट्र सरकार ने विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों के लिए 21,222 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की घोषणा की। इस पैकेज के उचित उपयोग की निगरानी के लिए नागपुर में विशेष केंद्र स्थापित किया जाएग। इस पैकेज के मुख्य उद्देश्य उद्योगों का विकास, सिंचाई सुविधाओं, कृषि और पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देना है।

मुख्य बिंदु

इस पैकेज से दूध एकत्रीकरण नेटवर्क तथा दूध प्रसंस्करण संस्थान शुरू किया जायेगा। इसके अतिरिक्त महानंदा की तरह एक और सरकारी दूध ब्रांड ‘गोंडवाना’ शुरू किया जायेगा। दुग्ध उत्पादों के निर्माण के लिए गढ़चिरोली में एक प्लांट स्थापित किया जाएगा। वाशिम में प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप पर एक कॉलेज स्थापित किया गया जायेगा। इसी कॉलेज में एक डेंटल कॉलेज भी खोला जायेगा, जिसका वहन राज्य सरकार करेगी। इसके अतिरिक्त अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जायेगा।

पृष्ठभूमि

2012 से 2016 के दौरान महाराष्ट्र में कई क्षेत्रों में सूखे के हालात बने हैं। सूखे की स्थिति सबसे अधिक भयावह विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में है। इन क्षेत्रों में किसानों द्वारा आत्महत्या किये जाने की दर काफी अधिक है। इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र के कई अन्य क्षेत्रों में भी सूखे के हालात हैं। राज्य में कई सिंचाई परियोजनाएं फण्ड की कमी के चलते अधर में लटकी हुई हैं।

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