नई दिल्‍ली

NDRF का 15वां स्थापना दिवस मनाया गया

नई दिल्ली में हाल ही में NDRF का 15वां स्थापना दिवस मनाया गया, इस दिवस पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले NDRF जवानों को सम्मानित किया गया। NDRF की स्थापना वर्ष 2006 में की गयी थी, अब तक NDRF ने एक लाख से अधिक लोगों के जीवन की रक्षा की है, जबकि सात लोगों को सुरक्षित घर पहुँचाया है। अब तक NDRF ने लगभग 3000 ऑपरेशन किये हैं।

राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (NDRF)

NDRF आपदा के समय त्वरित क्रिया करने वाला बल है, इसकी स्थापना वर्ष 2006 में आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत की गयी थी। NDRF का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। यह केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। NDRF के लिए नीति, योजना तथा दिशानिर्देश का निर्माण राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा किया जाता है।

NDRF प्राकृतिक आपदा, मानव निर्मित आपदा, दुर्घटना अथवा आपातकाल के दौरान राहत व बचाव कार्य करता है। इस दौरान जान-माल की रक्षा के लिए NDRF स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर कार्य करता है। वर्तमान में NDRF की 12 बटालियन देश के अलग-अलग हिस्सों में नियुक्त की गयी हैं।

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नई दिल्ली से कटरा के लिए वन्दे भारत एक्सप्रेस को रवाना किया गया

3 अक्टूबर, 2019 को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली से कटरा के लिए वन्दे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

वन्दे भारत ने नई दिल्ली और कटरा के बीच की दूरी को मात्र 8 घंटे में तय करेगी। गौरतलब है कि यह ट्रेन माता वैष्णो देवी के मंदिर जाने वाले भक्तों के लिए काफी उपयोगी सिद्ध होगी। यह ट्रेन अम्बाला कैंट, लुधियाना तथा जम्मू तवी स्टेशन में रुकेगी।

वन्दे भारत एक्सप्रेस

ट्रेन 18 भारत की पहली बिना इंजन की ट्रेन है। इसका निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में किया गया है। इस रेल के निर्माण में 100 करोड़ रुपये की लागत आई है। यह रेल 30 वर्ष पुरानी शताब्दी एक्सप्रेस का स्थान लेगी। इस रेल के 80% कल-पुर्ज़े भारत में निर्मित किये गये हैं, यह ट्रेन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ सकती है। 2019-20 तक इस प्रकार की 5 अन्य रेलों का निर्माण किया जायेगा।

16 कोच वाले इस प्रोटोटाइप में लोकोमोटिव (इंजन) नहीं है, यह शताब्दी रेल की तुलना में 15% कम समय लेगी। ट्रेन 18 में सेल्फ-प्रोपल्शन मोड्युल का उपयोग किया गया है, यह ट्रेन 160 किलोमीटर की गति से यात्रा करने की क्षमता रखती है। इस ट्रेन में तीव्र गति के लिए नई तकनीकों का उपयोग किया गया है। इसके अतिरिक्त इस ट्रेन में आटोमेटिक द्वार तथा जीपीएस बेस्ड यात्री सूचना प्रणाली इत्यादि का उपयोग भी किया गया है।
इस रेलगाड़ी का 3-4 दिन तक परीक्षण किया जायेगा। परीक्षण के सफल होने के बाद इस प्रोटोटाइप को रिसर्च डिजाईन एंड स्टैंडर्ड्स आर्गेनाईजेशन (RDSO) को सौंपा जायेगा। शताब्दी ट्रेन को 1988 में शुरू किया गया था, फिलहाल यह 20 मार्गों पर कार्यरत्त है, यह मेट्रो शहरों को अन्य महत्वपूर्ण शहरों से जोड़ती है।

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