नालसा

ओडिशा सरकार  ने केंद्र की “गवाह सुरक्षा योजना” को लागू किया

ओडिशा सरकार ने हाल ही में राज्य के उच्च न्यायालय में सूचित किया है कि राज्य सरकार ने केंद्र की “गवाह सुरक्षा योजना – 2018 का क्रियान्वयन कर दिया है।

गवाह सुरक्षा योजना 2018

इस योजना का निर्माण केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने 18 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, 5 राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों, पुलिस तथा तीन उच्च न्यायालयों से इनपुट प्राप्त करने के बाद किया। राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (नालसा) से विचार-विमर्श बाद इस योजना को अंतिम रूप दिया गया।

इस योजना का उद्देश्य गवाहों को सुरक्षा प्रदान करना है ताकि निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया का संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

विशेषताएं

  • खतरे की श्रेणियों की पहचान करना
  • पुलिस प्रमुख द्वारा खतरा विश्लेषण रिपोर्ट तैयार करना
  • रिकॉर्ड की गोपनीयता व संरक्षण
  • गवाह की पहचान की सुरक्षा, पहचान परिवर्तन तथा गवाह का संरक्षण इत्यादि

गवाहों की श्रेणियां

  1. गवाह अथवा उसके परिवार के जीवन को खतरा
  2. गवाह की सुरक्षा, सम्पति, परिवार के सदस्यों इत्यादि को खतरा
  3. गवाह की सुरक्षा, सम्पति, परिवार के सदस्यों इत्यादि को मध्यम स्तर का खतरा

उपरोक्त श्रेणी के गवाह जिले के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष सुरक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। सक्षम प्राधिकारी जिला व सत्र न्यायाधीश हो सकते हैं।

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जस्टिस एस. ए. बोबडे को नालसा का कार्यकारी चेयरमैन नामित किया गया

जस्टिस शरद अरविन्द बोबडे को भारतीय राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (नालसा) के कार्यकारी चेयरमैन के लिए मनोनीत किया गया। उन्हें नियुक्त करने के लिए राष्ट्रपति ने लीगल अथॉरिटीज एक्ट, 1987 के सेक्शन 3 के सब-सेक्शन (3) के क्लॉज़ (बी) का उपयोग किया जायेगा। वे जस्टिस ए.के. सिकरी की जगह लेंगे, जस्टिस सिकरी 6 मार्च को सेवानिवृत्त होंगे।

भारतीय राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (नालसा)

नालसा कस्टडी में व्यक्ति को निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाता है। इसका गठन लीगल सर्विसेज अथॉरिटीज एक्ट, 1987 के तहत की गयी थी। यह नागरिक तथा आपराधिक मामलों में निर्धन व्यक्तियों को निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाता है। यह विवादों के मैत्रीपूर्ण तथा शीघ्र समाधान के लिए लोक अदालत का आयोजन भी करता है। नालसा की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • संविधान के अनुच्छेद 39 A में समाज के कमज़ोर तबकों के लिए निशुल्क कानूनी सहायता की व्यवस्था है, इस प्रावधान को पूर्ण करने के लिए नालसा अस्तित्व में आया था।
  • विवादों के मैत्रीपूर्ण समाधान के लिए नालसा लोक अदालतों का आयोजन करता है।
  • नालसा का एक अन्य कार्य कानूनी साक्षरता तथा जागरूकता फैलाना भी है।
  • भारत के मुख्य न्यायधीश नालसा के पैट्रन-इन-चीफ के रूप में कार्य करते हैं, जबकि सर्वोच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायधीश इस प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष होते हैं।

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