नेपाल

रामायण सर्किट के तहत जनकपुर (नेपाल) और अयोध्या (भारत) के बीच बस सेवा की शुरुआत की गई

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और उनके नेपाली समकक्ष केपी शर्मा ओली ने संयुक्त रूप से जनकपुर (नेपाल) और अयोध्या (भारत) के बीच सीधी बस सेवा का उद्घाटन किया। नेपाल और भारत में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु स्वदेश दर्शन योजना के तहत भारत के रामायण सर्किट के भाग के रूप में यह बस सेवा शुरू की गई है ।

मुख्य तथ्य

प्रधान मंत्री मोदी ने हिंदू देवी सीता को समर्पित 20 वीं शताब्दी के जानकी मंदिर से बस सेवा को प्रारंभ किया , जहां उन्होंने विशेष प्रार्थना की थी । जनकपुर भगवान राम की पत्नी सीता के जन्म स्थान के रूप में जाना जाता है। जानकी मंदिर 1910 में माता सीता की याद में बनाया गया था। यह पूरी तरह से पत्थर और संगमरमर से बनी तीन मंजिला संरचना है यह 50 मीटर ऊंचा तथा 4,860 वर्ग फुट से अधिक फैला है। नेपाल में भारत की तरफ से यह प्रधानमंत्री मोदी की नेपाल की तीसरी तथा नई ओली सरकार के गठन के बाद से पहली उच्चस्तरीय यात्रा थी।

रामायण सर्किट के तहत 15 धार्मिक शहर

सरकार ने स्वदेश दर्शन योजना के तहत रामायण सर्किट विषय के तहत विकास हेतु भारत में 15 धार्मिक शहरों की पहचान की है। जिनमे अयोध्या, नंदीग्राम, श्रृंगपुरपुर और चित्रकूट (उत्तर प्रदेश), सीतामढ़ी, बक्सर और दरभंगा (बिहार), चित्रकूट (मध्य प्रदेश), जगदलपुर (छत्तीसगढ़), महेंद्रगिरी (ओडिशा), नासिक और नागपुर (महाराष्ट्र), भद्रचलम (तेलंगाना) , हम्पी (कर्नाटक) और रामेश्वरम (तमिलनाडु) शामिल हैं ।

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रक्सौल और काठमांडू के बीच सामरिक रेलवे नेटवर्क बनाने हेतु सहमति

भारत और नेपाल के बीच अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूती देने के लिए रेल नेटवर्क स्थापित करने पर सहमति बनी है। इस रेल नेटवर्क के जरिए भारत का इरादा नेपाल में चीन के लगातार बढ़ते दखल की भी काट करना है। नेपाल के पीएम केपी ओली और भारत के पीएम नरेंद्र मोदी के बीच हुई बातचीत के बाद इन फैसलों का ऐलान किया गया। थोक में माल की आवाजाही के लिए भारत बिहार के रक्सौल से नेपाल की राजधानी काठमांडू के बीच रणनीतिक रेल संपर्क का निर्माण करेगा। नई विद्युतीकृत रेल लाइन बनाने पर सहमति बनी है।

मुख्य तथ्य

० भारत के सीमांत शहर से नेपाल को जोड़ने वाली इस रेल लाइन का खर्च भारत वहन करेगा।
० इसका उद्देश्य दोनों पड़ोसी देशों के बीच संपर्क का विस्तार करना, लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देना और आर्थिक वृद्धि एवं विकास को तेज करना है। ।
० इस साल के अंत तक जयनगर से जनकपुर/कुर्था तथा जोगबनी से विराटनगर कस्टम यार्ड के बीच रेल लाइन 2018 में तैयार हो जाएगी। जयनगर – विजलपुरा-वर्दीवास और जोगबनी-विराटनगर परियोजनाओं के शेष हिस्से पर काम आगे बढ़ाया जाएगा।

यह रेल लाइन चीन के फैसले की काट करेगी

रक्सौल से काठमांडू को जोड़ने वाली रणनीतिक रेल लाइन इस संबंध में भी अहम है क्योंकि पहले चीन द्वारा तिब्बत से होकर नेपाल तक रेल रूट विकसित करने का ऐलान किया जा चुका है। हाल ही में चीन ने नेपाल को जोड़ने वाले तीन राजमार्गों पर भी काम शुरू किया है, जो 2020 तक पूरे हो जाएंगे। इसके अलावा न्यू जलपाईगुड़ी -काकरभिट्टा, नौतनवां- भैरहवा और नेपालगंज रोड-नेपालगंज रेल परियोजनाओं पर भी विचार चल रहा है।

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