पंजाब विधानसभा

पंजाब विधानसभा ने धार्मिक ग्रंथों के अपमान पर सजा के लिए पारित किया विधेयक

पंजाब विधानसभा ने भारतीय दंड संहिता (पंजाब संशोधन) बिल, 2018 तथा दंड प्रक्रिया संहिता (पंजाब संशोधन) बिल, 2018 पारित किया। इस विधेयक के द्वारा धार्मिक ग्रंथों के अपमान के लिए आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया। इससे पहले मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस संशोधन को स्वीकृत किया गया था। इसके अतिरिक्त सेवानिवृत्त न्यायधीश रंजीत सिंह ने धार्मिक ग्रंथों के अपमान पर अपनी रिपोर्ट विधानसभा में प्रस्तुत की।

मुख्य बिंदु

इस बिल के द्वारा भारतीय दंड संहिता और दंड प्रक्रिया संहिता में संशोधन करके नए प्रावधानों को जोड़ा गया। भारतीय दंड संहिता (पंजाब संशोधन) बिल, 2018 के द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC) में सेक्शन 295AA जोड़ा गया। इस बिल के अनुसार किसी धार्मिक ग्रन्थ को नष्ट करने अथवा किसी विशेष धार्मिक समुदाय की भावना को आहत करने के उद्देश्य से धार्मिक ग्रन्थ का अपमान करने पर दोषी व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है। इसका उद्देश्य समाज में धार्मिक सद्भाव को बनाये रखना है।

पृष्ठभूमि

2016 में पंजाब विधानसभा में अकाली दल-भाजपा सरकार ने भारतीय दंड संहिता (पंजाब संशोधन) बिल, 2018 तथा दंड प्रक्रिया संहिता (पंजाब संशोधन) बिल, 2018 पारित किया था। इस विधेयक में केवल गुरु ग्रन्थ साहिब के अपमान पर आजीवन कारावास का प्रावधान था। परन्तु राष्ट्रपति ने इस बिल को स्वीकृति देने से मना किया था। केंद्र ने इस बिल पर आपत्ति व्यक्ति करते हुए कहा था कि इस प्रकार के विधेयक को केवल किसी एक ही धर्म तक सीमित नहीं रखा जा सकता, अतः यह कानून सभी धार्मिक ग्रंथों पर लागू होना चाहिए।

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छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बलरामजी दास टंडन का हुआ निधन

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बलरामजी दास टंडन का निधन 14 अगस्त, 2018 को हुआ। मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदी पटेल छत्तीसगढ़ का अतिरिक्त कार्यभार संभालेंगी।

मुख्य बिंदु

बलरामजी दास टंडन का जन्म 1 नवम्बर, 1927 को अमृतसर में हुआ था। वे आजीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए थे।1969-70 में वे पंजाब के उप-मुख्यमंत्री थे। इसके अलावा 1977-79 और 1997-2002 में कैबिनेट में मंत्री भी रहे। 1951 में वे जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। वे 1951 से 1957 के बीच पंजाब में जनसंघ के सचिव रहे। वे 1960, 1962, 1967, 1969, 1977 और 1997 में पंजाब विधानसभा के सदस्य रहे। वे 1975 के दौरान आपातकाल में 19 महीने तक जेल में रहे। 14 जुलाई, 2014 को उन्हें छत्तीसगढ़ का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।

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