पर्यावरण संरक्षण

इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान

केन्द्रीय पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन सिंह ने हालही में इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान जारी किया। इसका उद्देश्य उत्सर्जन में कमी करना तथा नागरिकों को तापीय राहत प्रदान करना है।

इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान

  • इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान को विभिन्न सेक्टरों की कूलिंग आवश्यताओं को मध्यनजर रखते हुए 20 वर्ष के लिए तैयार किया गया है, इसमें सतत कूलिंग प्रदान करने के लिए तरीके सुझाए गये हैं।
  • इस एक्शन प्लान के तहत सरकार ने  कूलिंग उर्जा आवश्यकता में कम से कम 30% की कमी का लक्ष्य रखा है। इसके लिए AC तथा पंखों की उर्जा दक्षता में वृद्धि की जायेगी। इसके अतिरिक्त कोल्ड चेन के कार्य में भी दक्षता लाने का प्रयास किया जायेगा।
  • वर्तमान में इनस्टॉल किये गये एयर कंडीशनरों के बेहतर उपयोग के लिए सरकार एक लाख सर्विस तकनीशियन को प्रशिक्षण प्रदान करेगी।
  • इस एक्शन प्लान में बिल्डिंग एनर्जी कोड तथा तापीय मानकों के उपयोग द्वारा बिल्डिंग सेक्टर की कूलिंग आवश्यकता को कम करने का प्रयास किया जायेगा। इसके अतिरिक्त लोगों को सार्वजनिक परिवहन तथा हाइब्रिड व विद्युत् वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहन दिया जायेगा।
  • सरकार द्वारा लोगों को सस्ते घर प्रदान करने की योजना के तहत निर्मित किये जाने वाले भवनों का डिजाईन उर्जा दक्ष तरीके से किया जायेगा।
  • इस एक्शन प्लान में कहा गया है कि ओजोन को समाप्त करने वाले हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन पर नियंत्रण के लिए भी कार्य किया जा रहा है।

लक्ष्य

  • 2037-38 तक रेफ्रिजेरंट की मांग में 25-30% की कमी करना।
  • 2037-38 तक कूलिंग की मांग में 20-25% की कमी करना।
  • 2037-38 तक कूलिंग एनर्जी की आवश्यकता में 25-40% की कमी करना।

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जापान ने लिया अन्तर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग की सदस्यता छोड़ने का निर्णय

जापान ने अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग की सदस्यता छोड़ने का निर्णय लिया है, अब जापान जुलाई, 2019 से वाणिज्यिक व्हेलिंग फिर से शुरू करने जा रहा है। इसके पश्चात् जापानी व्हेलर्स पुनः तटीय क्षेत्रों में व्हेल मछली का शिकार कर सकेंगे। अब जापान में केवल अपने क्षेत्राधिकार वाले क्षेत्रों में व्हेल मछली का शिकार किया जायेगा। जापान ने दक्षिणी गोलार्ध में व्हेलिंग गतिविधियाँ नहीं करने का निर्णय लिया है।

कारण

जापान ने अन्तर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग में वाणिज्यिक व्हेलिंग की अनुमति देने के लिए काफी प्रयास किया। जापान ने अपने पक्ष में कहा था कि व्हेल की अधिकतर प्रजातियाँ विलुप्तप्राय नहीं हैं तथा व्हेल का मांस भोजन के रूप में खाना जापानी संस्कृति का हिस्सा है। IWC की सदस्यता छोड़ने के लिए जापान ने तर्क दिया है कि व्हेल का शिकार करना उनकी परंपरा का अभिन्न अंग है, व्हेल का शिकार छोड़ देने के कारण इस परंपरा को अगली पीढ़ी तक नहीं पहुँचाया जा सकेगा। इसके बाद जापान ने अन्तर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग की सदस्यता छोड़ी। परन्तु अन्तर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग ने जापान के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। इससे पहले आइसलैंड और नॉर्वे ने भी IWC द्वारा वाणिज्यिक व्हेल शिकार के प्रतिबन्ध की अवहेलना की थी।

अन्तर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग

अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग की स्थापना 1946 में व्हेल के संरक्षण के लिए की गयी थी। इसकी स्थापना व्हेल के शिकार के नियमन पर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन के अंतर्गत की थी। अन्तर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग का उद्देश्य व्हेल के संरक्षण पर कार्य करना तथा व्हेलिंग उद्योग का क्रमबद्ध विकास सुनिश्चित करना है। अन्तर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग एक अनुसूची के द्वारा व्हेलिंग का नियमन करता है, यह अनुसूची कानूनी रूप से बाध्य होती है।

अनुसूची में वाणिज्यिक व्हेलिंग की सीमा निश्चित की गयी है, यह क्षेत्र विशेष पर निर्भर होती है।  इस अनुसूची में व्हेल अभ्यारण्य, छोटी व्हेल मछलियों के संरक्षण तथा शिकार के तरीकों पर प्रतिबन्ध इत्यादि कई प्रावधान हैं।

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