पर्यावरण संरक्षण

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) कानपुर :कई बार लिखे जा सकने वाले कागज की खोज की गई

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) कानपुर के शशाक शेखर भारद्वाज ने पर्यावरण संरक्षण में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बिना लकड़ी के इस्तेमाल से केमिकल इंजीनियरिंग विभाग ने ऐसा कागज निर्मित किया है जिस पर कई बार लिखा जा सकता है। इसमें रसायनों के अलावा पॉलीमर कोटिंग का उपयोग हुआ है। केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के एचओडी प्रो. अनिमाग्सु घटक और पीएचडी के छात्र नीतिश कुमार ने इसे तैयार किया है।

मुख्य तथ्य

o सामान्य गीले कपड़े से इस पर लिखे शब्दों और चित्रों को साफ़ किया जा सकता है। फिर भी कागजों को साफ करने के लिये भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान सस्ते केमिकल की खोज कर रहा है।
o आईआईटी कानपुर और सिंगापुर के तकनीकी संस्थान एक साथ काम करने पर सहमत हुए हैं।
o सस्ती स्याही का इस्तेमाल इसमें होगा, जो छपे हुए कागजों को फिर से साफ कर सकेगी।
o कंप्यूटर से छपे खास तरह के पेपर को साफ करने के लिये डी-प्रिंटर बनाया जा रहा है। जिसके लिए डी-प्रिंटर बनाने हेतु सिंगापुर से सहायता ली जाएगी

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ऊर्जा संक्रमण सूचकांक में भारत को 114 देशों की सूची में 78 वां स्थान

विश्व आर्थिक मंच के ऊर्जा संक्रमण सूचकांक (एनर्जी ट्रांजिशन इंडेक्स) में भारत को 114 देशों की सूची में 78 वां स्थान मिला है. स्वीडन को इस सूची में शीर्ष स्थान हासिल हुआ है. ‘फोस्टरिंग इफेक्टिव एनर्जी ट्रांजिशन’ नामक रिपोर्ट के अनुसार, इस सूचकांक में देशों को इस आधार पर स्थान दिया गया है कि वे किस तरह से ऊर्जा सुरक्षा का संतुलन बनाने में सक्षम हैं और किस हद तक पर्यावरण संरक्षण एवं किफायती पहुंच बना पा रहे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने ऊर्जा की पहुंच बेहतर करने, ऊर्जा दक्षता और ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों की उपलब्धता को लेकर बड़े कदम उठाये हैं. हालांकि, देश में ऊर्जा संक्रमण को बड़े निवेश, उपयुक्त माहौल तथा उचित नियामकीय रूपरेखा की जरूरत है, ताकि इसे समर्थन मिल सके.

इस सूचकांक में ब्राजील 38वें, रूस 70वें तथा चीन 76वें स्थान पर हैं. भारत के मुकाबले उनकी स्थिति बेहतर है. इसमें स्वीडन के बाद नॉर्वे को दूसरा और स्विट्जरलैंड को तीसरा स्थान मिला है. शीर्ष 10 देशों में फिनलैंड, डेनमार्क, नीदरलैंड, ब्रिटेन, ऑस्ट्रिया, फ्रांस और आइलैंड शामिल हैं.

नोट

2013 और 2018 के बीच, भारत ने अपने प्रदर्शन के आंकड़े में 5.6 प्रतिशत की बढ़त हासिल की, मुख्य रूप से बेहतर ऊर्जा पहुंच, सब्सिडी कम हुई है और आयात लागत में कमी आई है । “बिजली की उपलब्धता में सुधार के लिए हालिया पहल ने कुछ सफलता का अनुभव किया है और दृष्टिकोण सकारात्मक रहे है; हालांकि, सभी के लिए बिजली और स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन तक लगातार पहुंच का रास्ता लंबा है

विश्व आर्थिक फोरम

इस फोरम की स्थापना 1971 में यूरोपियन प्रबंधन के नाम से जिनेवा विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रोफेसर क्लॉस एम श्वाब द्वारा की गई थी। स्विट्ज़रलैंड में स्थित यह एक गैर-लाभकारी संस्था है। मुख्यालय जिनेवा में है। स्विस अधिकारीयों द्वारा इसे एक निजी-सार्वजनिक सहयोग के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है। इसका उद्देश्य विश्व के व्यवसाय, राजनीति, शैक्षिक और अन्य क्षेत्रों में अग्रणी लोगों को एक साथ ला कर वैशविक, क्षेत्रीय और औद्योगिक दिशा तय करना है।

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