पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल के घोझडांगा और त्रिपुरा के अगरतला को आव्रजन चेक पोस्ट के रूप में नामित किया गया

6 मार्च, 2020 को पश्चिम बंगाल के घोझडांगा और त्रिपुरा के अगरतला को भूमि आव्रजन चेक पोस्ट के रूप में नामित किया गया था। यह भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित हैं।

मुख्य बिंदु

भारत सरकार ने भारत में प्रवेश करने और बाहर निकलने वाले सभी वर्गों  के यात्रियों की जाँच करने के लिए अगरतला और घोजडंगा को नामित किया है। आव्रजन पोस्ट यात्रियों के यात्रा दस्तावेजों की जांच करेंगे।

यह चेक पोस्ट पासपोर्ट नियम, 1950 के तहत अधिकृत हैं।

भारत-बांग्लादेश सम्बन्ध

बांग्लादेश भारत के सबसे मजबूत व्यापारिक साझेदारों में से एक है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापार 10 बिलियन डालर है। इसके अलावा बांग्लादेश, भारत में पर्यटन का सबसे बड़ा योगदानकर्ता है। बांग्लादेश में भारतीय उच्चायोग द्वारा जारी किया गया वीजा सभी भारतीय मिशनों में सबसे अधिक है। बांग्लादेश में भारतीय उच्चायोग  प्रतिवर्ष1 मिलियन से अधिक वीजा जारी करता है।

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पश्चिम बंगाल बना CAA के विरुद्ध प्रस्ताव पारित करने वाला चौथा राज्य

संसद ने शीतकालीन सत्र में नागरिकता संशोधन अधिनियम को पारित किया था। परन्तु कई राज्य इस अधिनियम का विरोध कर रहे हैं। केरल ने सबसे पहले इस अधिनियम के विरुद्ध प्रस्ताव पारित किया था। हाल ही में पश्चिम बंगाल ने भी इसी प्रकार का प्रस्ताव पारित किया है।

मुख्य बिंदु

केरल के बाद पंजाब, राजस्थान और पश्चिम बंगाल ने नागरिक संशोधन अधिनियम के विरुद्ध प्रस्ताव पारित किये हैं। इन राज्यों का दावा है कि राष्ट्रीय जनसँख्या रजिस्टर, नागरिकता संशोधन अधिनियम और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर आपस में सम्बंधित हैं।

एनपीआर (राष्ट्रीय जनसँख्या रजिस्टर)

राष्ट्रीय जनसँख्या रजिस्टर में भारत में रहने वाले लोगों के नाम  होते हैं। इस रजिस्टर को नागरिकता अधिनियम, 1955 तथा नागरिकता (नागरिक पंजीकरण तथा राष्ट्रीय पहचान पात्र) नियम, 2003 के तहत तैयार व अपडेट किया जाता है। राष्ट्रीय जनसँख्या रजिस्टर को 2010 में अपडेट किया गया था, इसके लिए 2011 की जनगणना के साथ डाटा एकत्रित किया गया था। इस रजिस्टर में लोगों के जनसांख्यिकी जानकारी होती है।

नियम

नागरिकता अधिनियम के सेक्शन 14A के अनुसार केंद्र सरकार को अनिवार्य रूप से सभी नागरिकों को पंजीकृत करना होगा तथा उनके पहचान पत्र जारी करना होगा। इसके अलावा सरकार के पास भारतीय नागरिकों का रजिस्टर भी होना चाहिए। इस कार्य के लिए राष्ट्रीय पंजीकरण प्राधिकरण की स्थापना की जानी चाहिए।

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