पाकिस्तान

पाकिस्तान और रूस के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास “द्रुज्बा III” आरम्भ हुआ

पाकिस्तान और रूस के बीच संयुक्त द्विपक्षीय सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास “द्रुज्बा III” शुरू हो गया है। इस अभ्यास का आयोजन पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्र में किया जायेगा। यह पाकिस्तान और रूस के बीच सैन्य अभ्यास का तीसरा संस्करण है।

मुख्य अभ्यास

यह सैन्य अभ्यास 4 नवम्बर तक चलेगा। इस सैन्य अभ्यास का आरम्भ वर्ष 2016 में हुआ था। अक्टूबर, 2016 में पाकिस्तान और रूस के बीच पहले संयुक्त सैन्य अभ्यास अ आयोजन किया गया था, इसका आयोजन पाकिस्तान में किया गया था। वर्ष 2017 में रूस में इस अभ्यास का आयोजन किया गया था। “द्रुज्बा” एक रूसी शब्द है, इसका अर्थ “मित्रता” होता है।

पिछले कुछ वर्षों में रूस और पाकिस्तान के बीच सम्बन्ध मज़बूत हुए हैं। इसका एक प्रमुख कारण पाकिस्तान के साथ अमेरिका का सख्त रवैया भी है, इससे पाकिस्तान का झुकाव चीन और रूस की ओर अधिक हुआ है। पाकिस्तान भी रूस के साथ रक्षा सम्बन्ध मज़बूत करने का इच्छुक है। पिछले तीन वर्षों में रूस ने पाकिस्तान को चार Mi-35M लड़ाकू तथा कार्गो हेलीकाप्टर दिए हैं।

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पाकिस्तान को चीन बेचेगा 48 विंग लूंग II सैन्य ड्रोन

चीन ने पाकिस्तान को 48 विंग लूंग सैन्य ड्रोन बेचने को मंज़ूरी दे दी है। यह आज तक का चीन को किसी भी देश के साथ ड्रोन के निर्यात के लिए किया गया सबसे बड़ा सौदा है। इस सौदे की राशि की जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं की गयी है। इन 48 ड्रोन विमानों का निर्माण चीन की चेंग्दू एयरक्राफ्ट कॉर्प तथा पाकिस्तान एयरोनॉटिकल काम्प्लेक्स द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा। चीन ने पहले मानवरहित ड्रोन को पहले संयुक्त अरब अमीरात और मिस्त्र को 1 मिलियन डॉलर प्रति ड्रोन की दर से बेचा है। जबकि चीन विंग लूंग I को इंडोनेशिया, कजाखस्तान तथा संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों को बीच चुका है।

विंग लूंग II

यह आधुनिक मानवरहित ड्रोन है, इसमें हवा से ज़मीन पर मार कर सकने वाले हथियार इस्तेमाल किये जा सकते हैं। इस निर्माण चेंग्दू एयरक्राफ्ट इंडस्ट्रियल (ग्रुप) कंपनी द्वारा किया जाता है। इस ड्रोन ने फरवरी, 2017 में अपनी पहली उड़ान भरी थी, यह विंग लूंग I मानव रहित ड्रोन का अपग्रेडेड संस्करण है।

इस ड्रोन का उपयोग जासूसी तथा हमला करने के कार्य के लिए किया जा सकता है, इसकी लम्बाई 11 मीटर है, इसके पंखों की लम्बाई 20.5 मीटर है। इसकी पेलोड क्षमता 480 किलोग्राम है। इसमें 12 लेज़र गाइडेड मिसाइलें अथवा YJ-9E युद्धपोत रोधी मिसाइलें इस्तेमाल की जा सकती हैं। यह ड्रोन 20 घंटे तक 150-370 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़ान भर सकता है। इस अधिकतम 9000 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है। यह ड्रोन स्थिर तथा चलनशील लक्ष्य को ध्वस्त करने की क्षमता कर सकता है। परन्तु अमेरिका के MQ-1 प्रिडेटर और MQ-9 रीपर ड्रोन तकनीकी रूप से इस चीनी ड्रोन से काफी बेहतर है।

चीन-पाकिस्तान रक्षा सम्बन्ध

चीन पाकिस्तान सेना का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता है। 2013-17 की अवधि में पाकिस्तान की 70% रक्षा खरीद चीन से ही की गयी है, इस दौरान इसमें पिछले 5 वर्षों की तुलना में 45% की वृद्धि हुई है। चीन और पाकिस्तान ने JF-थंडर एयरक्राफ्ट के संयुक्त रूप से निर्माण करने पर भी सहमती प्रकट की है। पाकिस्तान ने 2015 में ‘बुराक’ नाम ड्रोन का निर्माण किया गया, यह ड्रोन चीन के मध्यम रेंज के CH-3 ड्रोन सिस्टम पर आधारित था।

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