पाकिस्तान

मानव अधिकारों पर भारत ने पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की

संयुक्त राष्ट्र की मानव अधिकार परिषद के 37वें सत्र में भारत की मिनी देवी कुमम (सेकंड सेक्रेटरी)ने भारत को मानवाधिकार उल्लंघन पर सीख देने के लिए पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की गलियों में आतंकी बेखौफ घूम रहे हैं और वह भारत में मानवाधिकार के संरक्षण को लेकर बातें कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया मानवाधाकिर और लोकतंत्र पर ऐसे देश से सीख नहीं सुनना चाहती है जिसकी पहचान विफल देश के रूप में है।

आंतकवादी हाफिज सईद को पनाह देने और उसपर कार्रवाई ना करने को लेकर एकबार फिर पाकिस्तान पर निशाना साधा है। संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद के रेजॉलूशन 1267 का उल्लंघन करके संयुक्त राष्ट्र के द्वारा आतंकवादी घोषित हाफिज सईद पाकिस्तानी सरकार के संरक्षण में खुलेआम काम कर रहा है और संयुक्त राष्ट्र के द्वारा प्रतिबंधित किए गए संगठनों को राजनीति की मुख्यधारा में लाने का काम जारी है।

मानव अधिकार

मानव अधिकारों का अभिप्राय “मौलिक अधिकारों एवं स्वतंत्रता से है जिसके सभी मानव हकदार है। अधिकारों एवं स्वतंत्रताओं के उदाहरण के रूप में जिनकी गणना की जाती है, उनमें नागरिक और राजनैतिक अधिकार सम्मिलित हैं जैसे कि जीवन और आजाद रहने का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के सामने समानता एवं आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों के साथ ही साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने का अधिकार, भोजन का अधिकार काम करने का अधिकार एवं शिक्षा का अधिकार .

संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में था कि संयुक्त राष्ट्र के लोग यह विश्वास करते हैं कि कुछ ऐसे मानवाधिकार हैं जो कभी छीने नहीं जा सकते इसके साथ मानव की गरिमा स्त्री-पुरुष के समान अधिकार भी शामिल हैं। इस घोषणा के परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र संघ ने 10 दिसम्बर 1948 को मानव अधिकार की सार्वभौम घोषणा अंगीकार की। इस घोषणा से राष्ट्रों को प्रेरणा और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ और राष्ट् इन अधिकारों को अपने संविधान या अधिनियमों के द्वारा मान्यता देने और क्रियान्वित करने के लिए अग्रसर हुए। राज्यों ने उन्हें अपनी विधि में प्रवर्तनीय अधिकार का दर्जा दिया। 10 दिसम्बर 1948 को संयुक्त राष्ट्र संघ की समान्य सभा ने मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा को घोषित किया।

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कृष्णा कुमारी बनीं पाकिस्तान की प्रथम महिला दलित हिन्दू सीनेटर

पड़ोसी देश पाकिस्तान में कृष्णा कुमारी ने नया इतिहास रच दिया है. कृष्णा कुमारी पाकिस्तान की ‘पहली महिला दलित हिन्दू’ सीनेटर (राज्यसभा सांसद) बनी हैं.
पाकिस्तान की पहली मेंबर ऑफ़ नेशनल एसेंबली (लोकसभा सांसद) महिला हिन्दू सदस्य रीता ईश्वर लाल हैं, जो कि 2013 में महिलाओं के लिए रिज़र्व सिंध की NA-319 सीट से चुनी गईं. इसके पहले रत्ना भगवान दास चावला पाकिस्तान की पहली महिला हिन्दू सीनेटर (2006-2012) रह चुकी हैं लेकिन वे दलित हिन्दू नहीं थीं. इनको भी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने ही सीनेटर बनाया था.
सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की ओर से पाकिस्तान के सिंध प्रांत में थार से कृष्णा कुमारी मुस्लिम देश में ‘पहली महिला दलित हिन्दू’सेनेटर बनीं. बिलावल भुट्टो जरदारी की पार्टी पीपीपी ने अल्पसंख्यकों के लिए सीनेट की एक सीट पर उन्हें नामांकित किया गया . कृष्णा और इनके भाई पछले कुछ समय से एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर पीपीपी से जुड़े थे. बाद में उनके भाई को यूनियन काउंसिल बेरानो के चेयरमैन के रूप में चुना गया था .
पाकिस्तान के अपदस्थ प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन को अनंतिम परिणामों के अनुसार सीनेट में कुल 15 सीटों पर जीत हासिल हुई. इस जीत के साथ ही वह संसद के उच्च सदन में सबसे बडी़ पार्टी बनकर उभरी है.

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