पारिस्थितिकी तंत्र

उत्तराखंड में किया जायेगा हिमालयी राज्यों के प्रथम सम्मेलन का आयोजन

उत्तराखंड में हिमालयी राज्यों के प्रथम सम्मेलन का आयोजन मसूरी में 28 जुलाई को किया जायेगा, इस सम्मेलन का मुख्य फोकस सतत विकास होगा। इस सम्मेलन में हिमालयी राज्यों के प्रमुख समस्याओं पर चर्चा की जायेगी।

मुख्य बिंदु

इस सम्मेलन में उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश,मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा, मिजोरम तथा नागालैंड के मुख्यमंत्री तथा अन्य विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में ग्लोबल वार्मिंग के पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना तथा जल संरक्षण की विधियों इत्यादि पर चर्चा की जाएगी। इस दौरान हिमालयी क्षेत्र में सतत विकास के लिए एक्शन प्लान पर कार्य किया जायेगा तथा इसके ड्राफ्ट को नीति आयोग को सौंपा जायेगा।

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ग्लोबल वार्मिंग समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को सबसे अधिक प्रभावित करती है : अध्ययन

अमेरिका के रुटगर विश्वविद्यालय के द्वारा किये गये अध्ययन को जर्नल ऑफ़ नेचर में प्रकाशित किया गया है। इस अनुसन्धान में शीत रक्त समुद्री तथा थलीय प्रजातियों पर ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव की तुलना की गयी है। इस अध्ययन में विश्व भर में 400 प्रजातियों पर अध्ययन किया गया है। अनुसन्धानकर्ताओं ने 88 समुद्री तथा 294 थलीय प्रजातियों के लिए सुरक्षित परिस्थितियों की गणना की है।

मुख्य बिंदु

  • अध्ययन के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग थलीय प्रजातियों के मुकाबले समुद्री में निवास करने वाली प्रजातियों के दोगुना हिस्से को नष्ट कर सकती है।
  • समुद्री प्रजातियों पर इस खतरे से मानवीय समुदायों भी प्रभावित होंगे, विशेषतः मछली तथा शैलफिश पर निर्भर तटीय समुदाय।
  • समुद्री जनसँख्या कम होने के कारण प्रजातियों की जेनेटिक विविधता  कम हो जायेगी।
  • इस कारण यह है कि स्थल पर रहने वाले जानवर गर्मी से बचने के लिये वन, छायादार स्थान तथा भूमिगत स्थान में जा सकता है, परन्तु समुद्री जन्तुओं के पास इस प्रकार का विकल्प मौजूद नहीं है।
  • महासागर मानव को पोषण तथा आर्थिक गतिविधियों में काफी सहायता करते हैं, इसके लिए संरक्षण की आवश्यकता है। अधिक जानकारी के लिए और अधिक गहन अध्ययन किया जाना चाहिए।

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