प्रदूषण

कनाडा ने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर 2021 से प्रतिबन्ध लगाने का निर्णय लिया 

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिस ट्रूडो हाल ही में घोषणा की है कि वर्ष 2021 से देश में सिंगल-यूज़ प्लाटिक पर प्रतिबन्ध लगा दिया जायेगा, इसका उद्देश्य महासागरों में प्रवेश करने वाले कचरे को कम करना है। उन्होंने प्लास्टिक बैग, स्ट्रॉ तथा कटलरी को चलन से बाहर करने को वैश्विक चुनौती घोषित किया, इससे विश्व के महासागरों में प्रदूषण बढ़ रहा है।

मुख्य बिंदु

वर्तमान में कनाडा में केवल 10% कचरे को ही रीसायकल किया जाता है। कनाडा सरकार के अनुसार प्रतिवर्ष एक मिलियन से अधिक पक्षी तथा एक लाख से अधिक समुद्री जीव गलती से प्लास्टिक को भोजन समझ कर खाने के कारण मर जाते हैं अथवा घायल हो जाते हैं। समुद्री वातावरण को प्रदूषित करने में 70% हिस्सा प्लास्टिक कचरे का है। इससे पहले यूरोपीय संघ ने भी प्लास्टिक प्रदूषण पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, इटली तथा यूरोपीय संघ ने 2018 G7 शिखर सम्मेलन में महासागरों में प्रदूषण को कम करने के लिए प्रतिबद्धता ज़ाहिर की थी।

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राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए समिति का गठन किया गया

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए समिति का गठन किया गया। इस समिति के अध्यक्ष केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय के सचिव होंगे। इस समिति के अन्य सदस्य संयुक्त सचिव (थर्मल), उर्जा मंत्रालय, TERI महानिदेशक तथा IIT कानपूर के प्रोफेसर सचिदानंद त्रिपाठी होंगे।

मुख्य बिंदु

इस कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • यह एक पंचवर्षीय कार्यक्रम है, इसके द्वारा PM10 तथा PM 2.5 में 2024 तक 20-30% की कमी लायी जायेगी। इसके लिए 2017 को आधार वर्ष माना जायेगा।
  • इस कार्यक्रम में 23 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 102 नॉन-अटेनमेंट शहरों  को शामिल किया गया है। इन शहरों का चुनाव केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2011 से 2015 के बीच की वायु गुणवत्ता के आधार पर किया है।

नॉन-अटेनमेंट शहर

वे शहर नॉन-अटेनमेंट शहर हैं जिनमे राष्ट्रीय मानकों के मुताबिक वायु गुणवत्ता निरंतर ख़राब रहती है। नॉन-अटेनमेंट शहरों की सूची में दिल्ली, वाराणसी, भोपाल, कलकत्ता, नॉएडा, मुजफ्फरपुर और मुंबई ऐसे बड़े शहर शामिल हैं।

  • इस कार्यक्रम के तहत केंद्र ने देश भर में वायु की गुणवत्ता के माप के लिए मॉनिटरिंग नेटवर्क को फैलाने का निश्चय किया है।
  • 102 नॉन-अटेनमेंट शहरों में प्रदूषण के कारकों तथा उनके योगदान का अध्ययन किया जायेगा।
  • पर्यावरण मंत्रालय की सर्वोच्च समिति उचित सूचकों के आधार पर समय-समय पर प्रदूषण के कारकों की प्रगति की समीक्षा करती रहेगी।
  • प्रदूषण कारकों के आधार पर प्रत्येक शहर को क्रियान्वयन के लिए एक्शन प्लान तैयार करने के लिए कहा जायेगा।
  • इस कार्यक्रम के तहत रियल-टाइम डाटा कलेक्शन तथा तीन स्तरीय प्रणाली का उपयोग किया जायेगा तथा स्वच्छ वायु तकनीक के शोध को बढ़ावा दिया जायेगा।
  • राज्यों को ई-मोबिलिटी के क्षेत्र में कार्य करना होगा और चार्जिंग अधोसंरचना पर बल देना होगा तथा BS-VI नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। राज्यों को अपने स्तर पर सार्वजनिक परिवहन को अधिक बढ़ावा देना होगा।

हालांकि यह कार्यक्रम राज्यों के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है। पर्यावरणविदों ने इस कार्यक्रम को कानूनी रूप से बाध्य बनाने की मांग की है। प्रदूषण से करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए कड़े कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है।

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