प्रधानमंत्री

राष्‍ट्रपति ने राज्‍यपाल और उप-राज्‍यपाल की दो दिवसीय सम्‍मेलन की अध्यक्षता की

4 जून, 2018 को भारत के राष्‍ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने राष्‍ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले 49 वें दो दिवसीय राज्‍यपाल और उप-राज्‍यपाल सम्‍मेलन का उदघाटन किया. श्री कोविंद की अध्‍यक्षता में यह दूसरा सम्‍मेलन था. इस सम्मेलन में राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शासन प्रणाली में राज्‍यपाल पद की भूमिका पर प्रकाश डाला और पद के महत्व के औचित्य भी दिये. वर्ष 1949 में राष्ट्रपति भवन में राज्यपालों का पहला सम्मलेन आयोजित हुआ था और इस सम्मेलन की अध्यक्षता सी. राजगोपालाचारी ने की थी.

मुख्य बिन्दु

इस दो दिवसीय सम्मेलन में पांच अलग-अलग सत्रों के माध्यम से महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. सम्‍मेलन में सभी राज्‍यों और केंद्रशासित प्रदेशों के राज्‍यपाल और उप-राज्‍यपाल सहित कई मंत्रियों और विभिन्‍न मंत्रालयों के वरिष्‍ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया. प्रधानमंत्री, उप-राष्‍ट्रपति, विदेश मंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, कौशल विकास तथा उद्यमिता मंत्री, मानव संसाधन विकास मंत्री, संस्‍कृति राज्‍य मंत्री और नीति आयोग के उपाध्‍यक्ष तथा मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी सभी इस सम्मेलन में शामिल थे.

राष्‍ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने कहा कि राज्‍यपाल की भूमिका राज्‍य सरकार के लिए संरक्षक और मार्गदर्शक की होती, और साथ ही वे संघीय ढांचे की अति आवश्यक और महत्‍वपूर्ण कड़ी हैं और राज्य के पिछड़े वर्ग की आशाएँ भी इनसे जुड़ी है. राष्‍ट्रपति ने यह भी बताया कि देश की अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में आने वाला लगभग दस करोड़ की आबादी का विशाल हिस्सा, विकास की दृष्टि से अपेक्षाकृत पीछे रह गया है, और राज्‍यपालों को इन लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में अपना प्रयास करना चाहिए. राष्ट्रपति ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि राज्य सरकार के नियंत्रण में आने वाले देश के 69 प्रतिशत विश्‍वविद्यालयों के लगभग 94 प्रतिशत छात्र उच्‍च शिक्षा ग्रहण कर रहे है, और राज्‍यपाल इनमें से अधिकतर विश्‍वविद्यालयों के कुलपति का पद संभालते हैं, वें अपने पद के अधिकार और अनुभव से शिक्षा का स्तर सुधारने में मार्ग दर्शक की भूमिका निभा सकते है.

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भारत और इंडोनेशिया के बीच हुए 18 समझौते

एक्ट ईस्ट पॉलिसी को और मज़बूती देने के लिये 3 देशो की यात्रा पर निकले प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया में है, जहां उन्होने दोनो देशो के बीच साझेदारी को आगे बढाने पर बातचीत की है . भारत इंडोनेशिया के बीच 18 समझौते हुए तो व्यापारिक रिश्तो को आगे बढाने पर भी दोगुनी रफ्तार से काम करने पर सहमति बनी.

मुख्य तथ्य

हिंद – प्रशांत क्षेत्र में भारत और इंडोनेशिया ने समुद्री सहयोग का साझा दृष्टिकोण जारी किया . इस दस्तावेज में ‘ मुक्त , पारदर्शी , नियम आधारित , शांतिपूर्ण , संपन्न व समावेशी हिंद प्रशांत क्षेत्र ‘ की महत्ता को रेखांकित किया गया है जहां संप्रभुता व क्षेत्रीय अंखडता , नौवहन की आजादी , सतत विकास का सम्मान किया जाए.
यह किसी भी आसियान देश के साथ यह अपनी तरह का पहला दस्तावेज है.

एक्ट ईस्ट नीति

एक्ट ईस्ट नीति, 1991 में भारत सरकार द्वारा जारी लुक ईस्ट नीति का परिवर्तित रूप है लुक ईस्ट नीति को सहीं शब्दों में कहें तो पूर्वी देशों के साथ सांस्कृतिक संपर्क और दोनों देशों की जनता के बीच संपर्क बढ़ाना और सुरक्षा को देखना था . चीन के बढ़ते वर्चस्व पर लगाम लगाने के लिए एक्ट ईस्ट नीति पर काम करना काफी अहम है . क्योंकि चाइना सिल्क रोड प्रोजेक्ट के माध्यम से भारत की घेराबंदी के साथ अपने व्यापार को काफी बढ़ा रहा है.

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