प्रवासी भारतीय

9 जनवरी: प्रवासी भारतीय दिवस

9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है। इस दिवस के द्वारा भारत के विकास में विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदायों के लोगों के योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। इस दिवस के द्वारा विदेशों में रहने वाले भारतीयों को उनकी जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।

प्रवासी भारतीय दिवस

भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष प्रवासी भारतीय दिवस 9 जनवरी को मनाया जाता है। इसी दिन राष्ट्र पिता महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से स्वदेश वापस आये थे। इस दिवस को मनाने की शुरुवात सन 2003 से हुई थी। प्रवासी भारतीय दिवस मनाने की संकल्पना स्वर्गीय लक्ष्मीमल सिंघवी की देन है।

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2018 में भारत को विश्व में सर्वाधिक 79 अरब डॉलर का प्रेषण प्राप्त हुआ : विश्व बैंक

विश्व बैंक की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में भारत को विश्व में सर्वाधिक 79 अरब डॉलर प्रेषण (remittance) प्राप्त हुआ। यह राशि भारत को विदेश में निवास करने वाले नागरिकों से प्राप्त हुई है। भारत के बाद चीन (67 अरब डॉलर), मेक्सिको  (36 अरब डॉलर), फिलीपींस (34 अरब डॉलर) और मिस्र (29 अरब डॉलर) का स्थान है।

प्रेषण (remittance) : यह विदेश में काम करने वाले व्यक्ति द्वारा अपने देश में अपने रिवार को भेजी जाने वाली धनराशी है। विकासशील देशों में इस धनराशी का निर्धनता उन्मूलन में काफी महत्व होता है।

मुख्य बिंदु

यूरोप तथा मध्य एशिया : यूरोप तथा मध्य में प्रेषण में 11% वृद्धि के साथ यह 59 अरब डॉलर तक पहुँच गया है।

पूर्वी एशिया तथा प्रशांत क्षेत्र : 2018 में पूर्वी एशिया तथा प्रशांत क्षेत्र में प्रेषण में 7% की वृद्धि हुई और यह आंकड़ा 2018 में 143 अरब डॉलर पर पहुँच गया।

लैटिन अमेरिका तथा कॅरीबीयन : इस क्षेत्र में प्रेषण में 10% की वृद्धि हुई और कुल प्रेषण 88 अरब डॉलर पर पहुंचा।

भारत: पिछले तीन वर्षों से भारत में प्रेषण में काफी वृद्धि आई है। वर्ष 2016 में प्रेषण 62.7 अरब डॉलर, 2017 में 65.3 अरब डॉलर था। 2017 में यह प्रेषण भारत के सकल घरेलु उत्पाद का 2.7% था।

दक्षिण एशिया: दक्षिण एशिया में प्रेषण 12% की वृद्धि के साथ 2018 में 131 अरब डॉलर पर पहुंचा। 2017 में दक्षिण एशिया के सन्दर्भ में प्रेषण की वृद्धि दर 5.7% थी। बांग्लादेश और पाकिस्तान के प्रेषण में क्रमश: 15% तथा 7% की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि मुख्य रूप से विकसित देशों में बेहतर आर्थिक स्थितियों के कारण संभव हो सकी है। इसके अलावा तेल उत्पादक देशों जैसे बहरीन, कुवैत, ओमान, क़तर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात द्वारा तेल की कीमतों में वृद्धि किये जाने के कारण भी प्रेषण में वृद्धि हुई है।

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