बांग्लादेश

रीवा गांगुली दास को बांग्लादेश में भारत का उच्चायुक्त नियुक्त किया गया

रीवा गांगुली दास को हाल ही में बांग्लादेश में भारतीय उच्चायुक्त नियुक्त किया गया। वे वर्तमान में भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद् (ICCR) में महानिदेशक के पद पर कार्यरत्त हैं। वे उच्चायुक्त के पद पर हर्वर्धन श्रृंगला का स्थान लेंगी, हर्षवर्धन श्रृंगला को अमेरिका में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया है। रीवा गांगुली दास 1986 बैच की भारतीय विदेश सेवा अफसर हैं।

मुख्य बिंदु

रीवा गांगुली दास की पोस्टिंग सर्वप्रथम स्पेन में हुई थी, तत्पश्चात उन्होंने दिल्ली में विदेश मंत्रालय में कार्य किया। बाद में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र आर्थिक व सामाजिक मामले डिवीज़न में कार्य किया। उन्होंने नीदरलैंड के दूतावास में भारत की डिप्टी चीफ ऑफ़ मिशन के रूप में कार्य किया। वे रासायनिक हथियारों पर प्रतिबन्ध के लिए संगठन में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रह चुकी हैं। 2008 से 2012 के बीच उन्होंने शंघाई में कौंसल जनरल ऑफ़ इंडिया के रूप में कार्य किया।

आप इन अपडेट्स को करेंट अफेयर्स टूड़े मोबाइल एप्प में भी पढ़ सकते हैं।

Categories:

Month:

Tags: , , , , ,

बांग्लादेश ने लागू किया डिजिटल सुरक्षा बिल, 2018

बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हामिद ने विवादित डिजिटल सुरक्षा बिल, 2018 को स्वीकृति दे दी है, यह अब बिल कानून बन गया है। इस नए कानून में औपनिवेशिक काल के ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट में कुछ एक नए प्रावधान जोड़े गये हैं। नए नियम में बिना वारंट के गिरफ्तारी की व्यवस्था भी है। प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार ने इस कानून को साइबर अपराध रोकने के लिए आवश्यक बताते हुए इसका बचाव किया है।

डिजिटल सुरक्षा बिल 2018

बांग्लादेशी संसद ने साइबरक्राइम रोकने, धार्मिक भावनाओं को आहत करने, 1971 के स्वतंत्रता संग्राम व शेख मुजीबुर्रहमान (बंगबंधु) के बारे में गलत प्रचार करने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए इस विधेयक को पारित किया। इस बिल में अवैध ई-ट्रांज़ेक्शन तथा आपत्तिजनक डाटा का प्रचार भी शामिल है। इस बिल में न्यूनतम 7 वर्ष तथा अधिकतम 14 वर्ष की जेल की सज़ा का प्रावधान है, इसके अतिरिक्त इस बिल में न्यूनतम 25 लाख टका तथा अधिकतम 1 करोड़ टका के वित्तीय जुर्माने का प्रावधान भी है।

इस कानून का विरोध

बांग्लादेश में कई अधिकारी समूहों तथा पत्रकारों ने इस नियम को सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के विरुद्ध बताते हुए इसका विरोध किया। इनका मानना है कि इस नियम से देश में भय का माहौल उत्पन्न होगा और इससे खोजी पत्रकारिता जैसे कार्य को नहीं किया जा सकेगा। विरोधी दलों ने भी प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस कानून का विरोध किया है। बांग्लादेश में संयुक्त राष्ट्र के एम्बेसडर मार्शिया बेर्निकैट ने भी इस कानून की आलोचना की है। मार्शिया बेर्निकैट के अनुसार इस नियम से बांग्लादेश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दमन होगा जो कि बांग्लादेश के लोकतंत्र, विकास तथा समृद्धि के लिए नकारत्मक है।

आप इन अपडेट्स को करेंट अफेयर्स टूड़े मोबाइल एप्प में भी पढ़ सकते हैं।

Categories:

Month:

Tags: , , , ,

Advertisement