बालाकोट

Mi-17 दुर्घटना बड़ी गलती थी : वायुसेना प्रमुख

भारतीय वायुसेना प्रमुख राकेश कुमार सिंह भदौरिया ने कहा है कि फरवरी, 2019 में गलती अपने Mi-17 हेलिकॉप्टर को मार गिराना बहुत बड़ी गलती थी। भारत के स्पाइडर एयर डिफेन्स सिस्टम ने श्रीनगर एयरफील्ड में Mi-17 हेलिकॉप्टर को मार गिराया था।

पूरा घटनाक्रम

भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी को बालाकोट में एयरस्ट्राइक की, वायुसेना के लड़ाकू विमाओं ने बालाकोट में आतंकी ठिकानों पर बम गिराए थे। इसी दौरान कश्मीर में Mi-17 हेलिकॉप्टर के क्रेश होने की खबर आई थी। दरअसल एक वायुसेना के मानवरहित विमान (UAV) ने भारतीय वायुसेना के Mi-17 हेलिकॉप्टर को पाकिस्तानी हेलिकॉप्टर समझकर मार गिराया था। इस घटना में वायुसेना के 6 अधिकारी शहीद हुए थे।

पिछले सप्ताह सैन्य न्यायालय ने जांच पूरी की थी। इस जांच में Mi-17 हेलिकॉप्टर को मार गिराने के लिए पांच वायुसेना अधिकारियों को दोषी पाया गया था। कोर्ट ने कहा कि एक ग्रुप कैप्टेन, 2 फ्लाइट लेफ्टिनेंट तथा विंग कमांडर ने हेलिकॉप्टर को मार गिराने के दौरान प्रक्रिया का पालन सही प्रकार से नहीं किया।

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पाकिस्तान ने बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद खोला अपना एयरस्पेस

बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने अपना एयरस्पेस खोल दिया है, गौरतलब है कि भारत द्वारा एयरस्ट्राइक किये जाने के बाद पाकिस्तान ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था, जिस कारण भारतीय एयरलाइन्स को अपनी उड़ान का मार्ग बदलना पड़ा था। पाकिस्तानी एयरस्पेस के बंद हो जाने के बाद एयर इंडिया को लगभग 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि स्पाइसजेट को 30 करोड़ रुपये तथा इंडीगो को 25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

पृष्ठभूमि

भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में 26 फरवरी को की गयी एयरस्ट्राइक को “ऑपरेशन बन्दर” कोडनेम दिया था। भारतीय वायुसेना 26 फरवरी की सुबह लगभग 3:30 पर पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी ठिकानों पर हमला किया। इस कारवाई के लिए भारतीय वायुसेना के 12 मिराज 2000 लड़ाकू विमानों का उपयोग किया गया। इस कारवाई में भारतीय वायुसेना ने 1000 किलोग्राम विस्फोटक का उपयोग किया। इस हमले में बड़ी संख्या में आतंकियों के मारे जाने का अनुमान लगाया गया।

पुलवामा आतंकवादी हमला

14 फरवरी, 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में CRPF के जवानों पर आतंकी हमला किया गया, इस हमले में CRPF के 42 जवान शहीद हुए। इस हमले की ज़िम्मेदारी इस्लामिक चरमपंथी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने ली थी। इस दौरान सैनिक बस में यात्रा कर रहे थे। इस पर सवाल उठाये गये थे कि सैनिकों हवाई मार्ग से यात्रा की अनुमति क्यों नहीं दी गयी जब सड़क मार्ग से यात्रा करने में खतरा है।

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